देश की आजादी में मुस्लिम उलेमाओं के योगदान भुलाये नहीं जा सकते : मुफ्ती मोहम्मद जमालुद्दीन कासमी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारी शरीफ&comma; अजित &colon; <&sol;strong>आज़ाद भारत के इतिहास में दो दिन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं—पहला 15 अगस्त&comma; जिस दिन हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुआ&comma; और दूसरा 26 जनवरी&comma; जिस दिन हमारा देश लोकतांत्रिक बना और अपने संविधान को लागू किया&period;देश की आजादी में मुस्लिम उलेमाओं के योगदान भुलाये नहीं जा सकते है&period;भारत को गणतंत्र बनाने की यह यात्रा आसान नहीं थी&period; इस दिन का जश्न हमें लाखों लोगों की कुर्बानियों और बलिदानों के बाद नसीब हुआ&period;1601 में मुगल सम्राट जहांगीर के शासनकाल में अंग्रेज भारत में व्यापार के बहाने आए थे&period; 346 वर्षों तक अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया&comma; जिसके दौरान उन्होंने अत्याचार और शोषण की लंबी कहानी लिखी&period;संविधान निर्माण में जमीयत उलेमा-ए-हिंद का महत्वपूर्ण योगदान रहा&period;मौलाना हिफ्ज़ुर्रहमान सिवहारी ने संविधान सभा में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुनिश्चित कराने में अहम भूमिका निभाई&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>1857 की क्रांति असफल होने के बाद अंग्रेजों ने मुसलमानों और भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों पर भयंकर अत्याचार किए&period; हजारों उलेमा को फांसी दी गई&period; 30 मई 1866 को दारुल उलूम देवबंद की स्थापना हुई&comma; जिसने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई&period; यह विचार मुफ्ती मोहम्मद जमालुद्दीन कासमी&comma;आल इंडिया मिली काउंसिल&comma; फुलवारी शरीफ ने कही&period; उन्होंने आगे कहा कि आज़ादी की लड़ाई में मुसलमानों की भूमिका अहम रही&period; उनके बलिदान के बिना भारत की आज़ादी अधूरी रहती लेकिन आज़ादी मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल था कि देश का संविधान कैसा हो—धार्मिक या धर्मनिरपेक्ष&quest; इसमें सभी नागरिकों को न्याय&comma; स्वतंत्रता&comma; और समानता कैसे सुनिश्चित की जाए&quest; 26 जनवरी का महत्व यह है कि 1935 से लागू &&num;8216&semi;गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट&&num;8217&semi; को समाप्त करके भारतीय संविधान को लागू किया गया&period; <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाया और इसे 26 जनवरी 1950 को लागू करने की अनुमति दी&period;इसी दिन भारत में लोकतांत्रिक प्रणाली का आरंभ हुआ&period;26 जनवरी 1950 को इसे लागू कर भारत में पहला &&num;8220&semi;गणतंत्र दिवस&&num;8221&semi; मनाया गया&period; 1971 में इंदिरा गांधी ने संविधान की प्रस्तावना में &&num;8216&semi;सेकुलर&&num;8217&semi; शब्द जोड़ा&comma; जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा सभी धर्मों और संस्कृतियों के लिए समान रहेगा&period;26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाना हमारे लोकतंत्र&comma; समानता&comma; और विविधता का उत्सव है&period; इस दिन हम संविधान के निर्माताओं और देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं&period;<&sol;p>&NewLine;

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