शरीर ही धर्म का आधार है, रोगी की सेवा ही सच्ची पूजा है : गवर्नर डॉ. अरिफ मोहम्मद खान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> एम्स पटना के 14वें स्थापना दिवस समारोह में गवर्नर डॉ&period; अरिफ मोहम्मद खान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए&period; उन्होंने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि &OpenCurlyDoubleQuote;शरीर ही धर्म का आधार है&comma; रोगी की सेवा ही सच्ची पूजा है&period;”राज्यपाल ने कहा कि एम्स पटना ने स्वास्थ्य सेवा&comma; शिक्षा और अनुसंधान में राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान बनाई है&period; यह न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है कि एम्स पटना गरीब और लाचार मरीजों के लिए सबसे बड़े विश्वास का केंद्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि बिहार की बड़ी आबादी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आती है&comma; जो बीमारी के समय भारी खर्च और कठिनाई से परेशान रहती है&period; ऐसे में एम्स पटना गरीब और कमजोर मरीजों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभा रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राज्यपाल ने कहा कि यहाँ न केवल इलाज&comma; औषधि और परामर्श की सुविधा मिलती है&comma; बल्कि शिविरों और आउटरीच कार्यक्रमों के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों में भी मरीजों को सेवा और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता दी जाती है&period; इस तरह एम्स पटना चिकित्सा सेवा का केंद्र होने के साथ-साथ सामाजिक दायित्व का निर्वहन भी कर रहा है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राज्यपाल ने एम्स पटना की 14 वर्षों की यात्रा को सराहते हुए कहा कि संस्थान ने मातृ-शिशु स्वास्थ्य&comma; पोषण&comma; टीकाकरण&comma; कैंसर&comma; हृदय और न्यूरोलॉजी जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय शोध और उपचार कार्य किया है&period; कोविड महामारी के समय एम्स पटना राज्य का सबसे बड़ा उपचार केंद्र और नियंत्रण केंद्र बनकर सामने आया&period; यहाँ आईसीयू&comma; वेंटिलेटर&comma; टीकाकरण और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं का विस्तार कर दूर-दराज़ क्षेत्रों तक मरीजों को सेवा उपलब्ध कराई गई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अपने संबोधन में गवर्नर ने कहा कि महाकवि कालिदास ने लिखा है – &OpenCurlyDoubleQuote;शरीर माध्यम खरु धर्म साधनम्”&comma; अर्थात स्वस्थ शरीर ही धर्म साधना का आधार है&period; उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म का वास्तविक अर्थ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं&comma; बल्कि दूसरों के दुख-दर्द को दूर करना और मानवता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने भी रोगी की सेवा को सबसे बड़ी पूजा बताया है&period; चिकित्सक जब करुणा के भाव से रोगी का उपचार करता है&comma; तो वह सबसे बड़ा पुण्य अर्जित करता है और यही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है।<&sol;p>&NewLine;

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