सफलता की कहानी : जब शब्द नहीं थे, तब ब्लॉक प्रिंटिंग बनी निधि की आवाज

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><em>पटना&comma;<&sol;em> &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; सहरसा की निधि कुमारी ने यह साबित कर दिया है कि अगर जज्बा हो&comma; तो कोई भी बाधा मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकती। जन्म से मूक-बधिर निधि ने अपने हुनर को ही संवाद का माध्यम बना लिया है। जब निधि के लिए बोलना और सुनना मुमकिन नहीं था&comma; तब कला ही उनकी अभिव्‍यक्ति की भाषा बन गई। निधि ने पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग में ऐसी दक्षता हासिल की है। जो न केवल देखने वालों को मोहित करती है&comma; बल्कि उनके जज्बे की भी गवाही और सफलता की कहानी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><em>बचपन में ही पकड़ ली थी कला की राह<&sol;em><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>निधि ने महज आठ साल की उम्र में ब्लॉक प्रिंटिंग की बारीकियां सीखनी शुरू कर दी थीं। लकड़ी के ब्लॉकों से कपड़ों पर डिज़ाइन बनाना उनके लिए सिर्फ एक कला नहीं&comma; बल्कि खुद को अभिव्यक्त करने का माध्‍यम था। निधि ने अपनी शारीरिक कमजोरियों को अपनी सफलता के आगे रोड़ा नहीं बनने दिया। कठिनाइयां तो थीं मगर हौसलों से अपनी उड़ान जारी रखी। आज यही उनकी ताकत बन चुकी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><em>उपेंद्र महारथी संस्थान से मिला निखार<&sol;em><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>निधि ने उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान&comma; पटना में ब्लॉक प्रिंटिंग की पारंपरिक तकनीकों का विधिवत प्रशिक्षण लिया। वहां निधि ने न केवल अपने हुनर को और निखारा&comma; बल्कि कई जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पुरस्कार भी जीते। उनके काम को बिहार कला उत्सव जैसे सरकार के मंचों के जरिए प्रोत्‍साहित किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><em>कला में दिखता है जीवन का दर्शन<&sol;em><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>निधि की बनाई हुई डिजाइनों में ग्रामीण जीवन&comma; प्रकृति&comma; और लोक परंपराएं पूरी जीवंतता से झलकती हैं। हर एक प्रिंट में भावनाओं की गहराई और अनुशासन साफ नजर आता है। उनकी कलाकृतियां न केवल सौंदर्य की दृष्टि से अद्वितीय हैं&comma; बल्कि सामाजिक संवाद का भी माध्यम हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><em>समाज के लिए प्रेरणा<&sol;em><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>निधि की कहानी उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत है जो जीवन में चुनौतियों से हार मान लेते हैं। उन्होंने मूक-बधिरता को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। आज वह न सिर्फ एक कुशल कलाकार हैं&comma; बल्कि एक आदर्श भी हैं&comma; जो यह बताती हैं कि भाषा केवल शब्दों की मोहताज नहीं होती&comma; उसे जीने का जज्बा होना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;

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