नुक्कड़ नाटक में गुटखा-खैनी से दूर रहने की दी गई नसीहत

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच की साप्ताहिक नुक्कड़ नाटक श्रृंखला के तहत महेश चौधरी द्वारा लिखित एवं मिथिलेश कुमार पांडे द्वारा निर्देशित नाटक &OpenCurlyDoubleQuote;गुटखा-खैनी से रहे दूर” का प्रभावशाली मंचन वाल्मी&comma; फुलवारी शरीफ में किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>नाटक की शुरुआत अमन राज के स्वरबद्ध गीत—&OpenCurlyDoubleQuote;कहनवा मा नs ए भईया छोड़ी द नs खैनी जर्दा पानवा&comma; कहनवा मा नs ए सईया…”—से हुई&comma; जिसने दर्शकों का ध्यान तुरंत आकर्षित किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>नाटक की कथा में दिखाया गया कि एक छात्र कॉलेज जीवन में गलत संगत में पड़कर गुटखा&comma; पान&comma; सिगरेट और खैनी की लत का शिकार हो जाता है&period; कुछ समय बाद उसके जबड़े में फुंसी जैसी गांठ उभरती है&period; दंत चिकित्सक से जांच कराने पर प्रारंभिक स्तर के कैंसर के लक्षण सामने आते हैं&period; आगे जांच में डॉक्टर ओरल कैंसर की पुष्टि करते हैं और बताते हैं कि यह तंबाकू&comma; गुटखा&comma; पान&comma; बीड़ी और सिगरेट के सेवन से होता है&period; इलाज के दौरान ऑपरेशन&comma; लगातार दवाइयां और रेडिएशन थेरेपी के बाद उसकी स्थिति नियंत्रित होती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्वस्थ होकर घर लौटने पर वह अपने मित्रों से अपील करता है कि उसे बड़ी मुश्किल से नई जिंदगी मिली है&comma; इसलिए वह जीवन भर नशे से दूर रहेगा और दूसरों को भी इससे बचने की सलाह देता है&comma; क्योंकि इससे जान भी जा सकती है। नाटक में महेश चौधरी&comma; मिथिलेश कुमार पांडे&comma; कामेश्वर प्रसाद&comma; सौरभ&comma; अमन&comma; करण&comma; प्रमोद&comma; रोहित&comma; अंजनी कुमार वर्मा एवं देव दर्शन ने सशक्त अभिनय किया&period; कार्यक्रम के माध्यम से तंबाकू उत्पादों से होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रभावी संदेश दिया गया।<&sol;p>&NewLine;

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