गुरु ग्रन्थ साहिब के प्रकाश पर्व को समर्पित होकर गुरुद्वारा गायघाट में विशेष समागम

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> तख्त श्री हरिमन्दिर जी पटना साहिब प्रबन्धक कमेटी और समुह साध संगत के द्वारा गुरुद्वारा गायघाट में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व पूर्ण श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी बलदेव सिंह के द्वारा अरदास की गई। श्री दरबार साहिब अमृतसर से रागी जत्था जगतार सिंह&comma; जालंधर से बीबी जागीर कौर जत्था&comma; तख्त साहिब के हजूरी रागी भाई नविन्दर सिंह ने गुरबाणी के मनोहर कीर्तन से संगत को निहाल किया। कथावाचक ज्ञानी चरनजीत सिंह द्वारा गुर इतिहास की कथा श्रवण करवाई गई। इस अवसर पर धर्म प्रचार के चेयरमैन महिन्दरपाल सिंह ढिल्लो&comma; सुपरीटेंडेट दलजीत सिंह&comma; मैनेजर हरजीत सिंह&comma; अमरजीत सिंह शम्मी&comma; दमनदीप सिंह रानू आदि मौजूद रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सः महिन्दरपाल सिंह ढिल्लो ने कहा सिख समाज के लोग भाग्यशाली हैं कि गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश करवाया और फिर दशमेश पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने पूरी सिख कौम को गुरु ग्रंथ साहिब जी का अनुयायी बनाया। गुरु के मार्ग पर चलकर ही सिख आज विश्वभर में प्रगति कर रहे हैं और अपनी उपलब्धियों का लोहा मनवा रहे हैं। उन्होंने कहा गुरु ग्रन्थ साहिब एकमात्र ऐसे ग्रन्थ हैं जिन्हें जीवित गुरु का दर्जा प्राप्त है। उन्हांेने प्रबन्धक कमेटी के समुह पदाधिकारियों की ओर से गुरु ग्रन्थ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व की संगत को बधाई दी।<&sol;p>&NewLine;

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