RJD का उम्मीदवार देवेश बाबू का डमी कैंडिडेट,प्रशांत किशोर दो माह मे ही झुठे साबीत हुए- राकेश रौशन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>जन्दाहा&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> हाजीपुर में तिरहुत क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले स्नातक प्रत्याशी के रूप में राकेश रौशन&comma; अपने क्षेत्र की आवाज उठाने के लिए यहाँ हूँ। हर बार की तरह इस बार भी देवेश बाबू ने एक डमी उम्मीदवार को आरजेडी से खड़ा किया है ताकि वे अपनी जीत सुनिश्चित कर सकें। लेकिन इस बार उनकी योजना विफल हो गई। उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि मैं तिरहुत को किसी तरह की ठगी का शिकार नहीं होने दूँगा। यह कोई साधारण लड़ाई नहीं है&semi; तिरहुत वासी मुझे पहचानते हैं। जहाँ भी मैं जा रहा हूँ&comma; मुझे समर्थन कर रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-large"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;newscrime24&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2024&sol;11&sol;img-20241124-wa0005938840326172268748-840x560&period;jpg" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-65009"><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मैं अपनी पूरी जिंदगी भी तिरहुत को समर्पित कर दूँ&comma; तब भी इस कर्ज को नहीं चुका पाऊँगा।उक्त बातें राकेश रौशन ने जन्दहा में स्थित मतदाता आशीर्वाद सभा में कहा और आगे उन्होंने कहा कि बिहार सरकार &OpenCurlyDoubleQuote;स्मार्ट” योजनाओं के नाम पर स्मार्ट मीटर के जरिये आम जनता से लूट करने का काम कर रही है। लेकिन स्थानीय राजनीतिक नेता इस पर मौन हैं क्योंकि उनके मालिक जो पटना में बैठे हैं&comma; उनसे नाराज़ हो सकते हैं। मगर मेरे लिए मेरे मालिक तिरहुत की जनता है&comma;और मेरी निष्ठा हमेशा आप लोगों के प्रति ही रहेगी।मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि जब जेडीयू के नेता आपके पास आएं तो उनसे कड़े सवाल पूछें। जैसे कि जब ज़मीन का सर्वे होता है और स्थानीय अधिकारी रिश्वत लेते हैं&comma; तो वह पैसा कहाँ जाता है&quest; इस सवाल का जवाब वे नहीं देंगे क्योंकि उनके मालिक&comma; जो पटना में बैठे हैं&comma; नाराज़ हो जाएंगे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आप सब प्रशांत किशोर को जानते हैं। उन्होंने कहा था कि 1200 परिवारों में जो लोग एमपी-एमएलए बने हैं&comma; उन्हें अब टिकट नहीं देंगे। लेकिन इस स्नातक चुनाव में टिकट किस परिवार को दिया गया&quest; उनके बाप-दादा सभी विधायक और सांसद रह चुके हैं।उनकी पार्टी बने हुए अभी दो महीने भी नहीं हुए और वे अपने वादों से पीछे हट गए। ऐसे लोगों को पहचानिए&comma; जो दो महीने भी अपनी बात पर नहीं टिक सके।सत्ता में आने के लिए ये लोग गांधी जी के सहारे झुठ बोल रहे है।अन्य पार्टी के उमीदवार पर साधा निशाना राकेश रौशन और उन्होंने कहा कि हमारा संविधान कहता है कि स्नातक चुनाव व्यक्तिगत आधार पर होना चाहिए&comma; पार्टी के प्रतीक चिन्ह पर नहीं। फिर भी पार्टियाँ अपने उम्मीदवारों का समर्थन करती हैं। यह न केवल संविधान&comma; बल्कि अपने कार्यकर्ताओं से भी धोखा है। अगर समर्थन देना ही था तो स्थानीय उम्मीदवार को देते। जेडीयू का प्रत्याशी बाहरी है&comma; और आप सबको यह बात पता है। मैं तिरहुत का हूँ&comma; आप सबके बीच का हूँ। हर पार्टी का कार्यकर्ता मुझसे संपर्क कर रहा है&comma; मुझे समर्थन दे रहा है। मुझे खुशी है कि आप सभी का आशीर्वाद मुझे मिल रहा है&comma; और मैं इसके लिए सदैव ऋणी रहूँगा।<&sol;p>&NewLine;

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