सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; à¤¸à¥‹à¤¨à¥‚ कुमार &colon;<&sol;strong> सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन बिहार के 43वें राज्यपाल बन गए हैं। लोक भवन में आयोजित एक समारोह में पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार&comma; उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-large"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;newscrime24&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2026&sol;03&sol;img-20260314-wa00123559297539011609105-535x365&period;jpg" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-81973"><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सैयद अता हसनैन ने हिंदी में शपथ ली। इसके बाद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राज्यपाल की नियुक्ति संबंधि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पत्र पढ़कर सुनाया। गौरतलब कर दूं कि हसनैन ने आरिफ मोहम्मद खान का स्थान लिया है । समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार&comma; उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों और वरिष्ठ अधिकारियों समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। सेना में हसनैन की अंतिम तैनाती सैन्य सचिव के रूप में थी&comma; जो वरिष्ठ स्तर के कार्मिक प्रबंधन के लिए जिम्मेदार एक महत्वपूर्ण पद है।इससे पहले&comma; उन्होंने जम्मू कश्मीर में सेना की 15 कोर की कमान संभाली थी। सेवानिवृत्ति के बाद भी हसनैन राष्ट्रीय और शैक्षणिक भूमिकाओं में सक्रिय रहे&period; उन्हें 2018 में केंद्रीय कश्मीर विश्वविद्यालय का कुलाधिपति नियुक्त किया गया था। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वह 2020 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण &lpar;एनडीएमए&rpar; के सदस्य के रूप में शामिल हुए थे।चिनार कोर के कामांडिंग इन चीफ भी रह चुके हैं सैयद हसनैन लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन भारतीय सेने की श्रीनगर स्थित चिनार कोर के पूर्व कामांडिंग इन चीफ भी रह चुके हैं। वे कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति थे। उन्होंने सेने में रहते हुए भी कई सामाजिक अभियान चलाए&comma; जिसमें उन्होंने युवाओं के शिक्षा&comma; रोजगार और खेल को लेकर कई कार्यक्रमों को चलाया ताकि वे एक अच्छा नागरिक बनने के लिए लोगों को प्रेरित करें।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रिटायर्मेंट के बाद भी वे अपने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और राष्ट्रीय सुरक्षा और रोजगार से जोड़ने के लिए कई अभियान चलाए&period; जिसमें कश्मीर के युवाओं को मुख्य रूप से जोड़ने की कोशिश की। इसी वजह से उन्हें सैन्य अधिकारी के साथ-साथ एक रणनीतिक विचारक के रूप में भी देखा जाता है। अब बिहार के राज्यपाल के रूप में उनके सामने संवैधानिक जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण दायित्व है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि उनका अनुभव राज्य के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

फ्लैट फर्जीवाड़ा कांड : पूर्व डीसीएलआर मैत्री सिंह, पिता व भाई पर कोर्ट का संज्ञान

जमीन के विवाद में बेटे ने मां को मारी गोली, एम्स में चल रहा इलाज

महावीर कैंसर संस्थान में दावत-ए-इफ्तार का आयोजन, सैकड़ों रोजेदारों ने की शिरकत