फाइलेरिया प्रभावित अंग की समुचित देखभाल से रहमती का जीवन हुआ आसान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">अररिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> फाइलेरिया यानी हाथी पांव कभी ठीक न होने वाला एक असाध्य रोग है। फाइलेरिया संक्रमण का पता लोगों को वर्षों बाद चलता है। जब रोग का लक्षण संक्रमित व्यक्ति के शरीर पर स्पष्ट तौर पर दिखने लगता है। संक्रमण के प्रभाव से रोगी के हाथ&comma; पांव&comma; अंडकोष सहित शरीर के अन्य अंग में अत्यधिक सूजन उत्पन्न होने लगता है। समय-समय पर रोगियों को प्रभावित अंगों में दर्द&comma; लालपन व तेज बुखार की शिकायत होती है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>शुरुआत में सूजन अस्थायी होती लेकिन बाद में ये स्थायी व लाइलाज हो जाती है। ऐसे हालात में रोग प्रभावित अंग की समुचित देखभाल जरूरी होती है। करीब 20 वर्षों से फाइलेरिया संक्रमण की शिकार रहमती खातून बताती हैं कि हाथीपांव का कोई स्थायी निदान तो नहीं है। लेकिन अन्य रोगों की तरह इसकी रोकथाम व उपचार संभव है। प्रभावित अंगों की समुचित देखभाल उपचार का एक बेहतरीन माध्यम है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>नियमित साफ-सफाई व व्यायाम से हुआ फायदा &&num;8211&semi;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>रानीगंज प्रखंड अंतर्गत बसेठी वार्ड संख्या 09 निवासी रहमती खातून बताती हैं कि बीते 20 साल से रोगग्रस्त हैं। बहुत इलाज के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ। फिर उन्हें गांव में ही संचालित फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क से जुड़ने का मौका मिला। ग्रुप से जुड़ने के बाद उन्हें प्रभावित अंग की देखरेख व व्यायाम से होने वाले लाभ का पता चला। तब से वे नियमित रूप से इसका अभ्यास कर रही हैं। इसका फायदा ये हुआ कि रोग प्रभावित अंग का सूजन बिल्कुल कम हो गया। पहले की तरह अब बुखार&comma; लाली व जलन की शिकायत भी कम होने लगी। आसानी से अपना सारा काम निपटाने लगी। इससे प्रभावित होकर रहमती अब समूह में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए रोग प्रभावित दूसरे लोगों को भी इस संबंध में जानकारी देते हुए उनका जीवन आसान बनाने के प्रयास में जुटी हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फाइलेरिया क्लिनिक का संचालन रोगियों के लिये लाभप्रद &&num;8211&semi;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>रहमती बताती हैं कि रोग प्रभावित अंग के सूजन को कम करने के लिये स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुछ विशेष व्यायाम के नियमित अभ्यास का सुझाव दिया जाता है। इसमें प्रभावित अंगों को अलग-अलग दिशाओं में घुमाना होता है। इससे सूजन की समस्या घटती है। साधारण साबुन व साफ पानी से प्रभावित अंग को धोना&comma; मुलायम व साफ कपड़े से इसे पोछना&comma; संक्रमित अंग को ब्रश आदि से साफ नहीं करना व इसे खुजलाने से परहेज करना इसके उचित देखरेख के लिहाज से जरूरी है। इसके अलावा रानीगंज रेफरल अस्पताल में संचालित फाइलेरिया क्लिनिक के माध्यम से भी फाइलेरिया रोगियों को जरूरी दवा व मलहम आसानी से उपलब्ध करायी जाती रही है। जो रोगियों के लिये विशेष रूप से लाभप्रद है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>उपयोगी साबित हो रहा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप &&num;8211&semi;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रानीगंज रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ रोहित कुमार झा ने बताया कि फाइलेरिया को नियंत्रित करने के लिये प्रभावित अंग की समुचित देखरेख व व्यायाम जरूरी है। इसके प्रति आम रोगियों को जागरूक करने के उद्देश्य से ग्रामीण स्तर पर फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट समूह गठित किया गया। मासिक रूप से इसकी नियमित बैठकों में मरीज को जरूरी व्यायाम व साफ-सफाई के तकनीक के बारे में बताया जाता है। रोग के विभिन्न चरणों के आधार पर रोगियों को जरूरी सुझाव दिया जाता है। ताकि रोग को नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में पेशेंट सपोर्ट समूह की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।<&sol;p>&NewLine;

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