बच्चों को विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए नियमित टीकाकरण आवश्यक

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&comma; &lpar;न्यूज क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>बच्चों के जन्म के बाद उन्हें विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होने का खतरा बना रहता है। बच्चों को इन बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए उन्हें नियमित स्तनपान कराने के साथ-साथ सुरक्षा का टीका लगाना आवश्यक होता है। टीका लगाने से बच्चों के शरीर में विभिन्न बीमारियों से लड़ने की क्षमता का विकास होता है और वे स्वस्थ रह सकते हैं। बच्चों के जन्म के बाद से ही सभी प्रकार के टीका लगाने की व्यवस्था सभी स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क उपलब्ध है। नियमित टीकाकरण के दौरान बच्चों का कोई भी टीका छूट नहीं सके इसलिए सभी परिजनों को बच्चे के जन्म के बाद ही पहला टीका लगते हुए टीकाकरण कार्ड प्रदान किया जाता है। जिसके माध्यम से लोग बच्चों को निर्धारित अवधि के दौरान विभिन्न प्रकार की टीका लगवा सकें।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सभी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ समुदाय स्तर पर भी कैम्प लगाकर किया जाता है नियमित टीकाकरण &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी &lpar;डीआईओ&rpar; डॉ विनय मोहन ने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों&comma; उपकेंद्रों के साथ साथ आरोग्य दिवस के दौरान समुदाय स्तर पर भी कैम्प लगाकर नियमित टीकाकरण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था समय के अनुसार टीडी-1&comma; 2 के साथ साथ टीडी बूस्टर डोज लगाया जाता है। इसके अलावा जन्म लेने वाले बच्चों को भी ओपीवी&comma; बीपीसी&comma; हेपेटाइटिस-बी&comma; रोटा&comma; एफआईपीवी&comma; पेंटावैलेन्ट&comma; पीसीवी&comma; एमआर&comma; जेई&comma; डीपीटी और टीडी की टीका लगाई जाती है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह सभी टीका बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार समय समय पर लगाया जाता है। इसके लिए स्वास्थ्य केंद्रों के साथ साथ विभिन्न क्षेत्रों में कैम्प लगाया जाता है जहां एएनएम द्वारा आशा कर्मियों की मदद से छूटे हुए बच्चों को चिन्हित कर उन्हें टीका उपलब्ध कराई जाती है। डीआईओ ने बताया कि वर्तमान में जिले के कसबा प्रखंड में एक बच्चे की मृत्यु जेई की कारण पाई गई थी। इसे देखते हुए कसबा प्रखंड के अन्य बच्चों को अलग से विशेष अभियान चलाकर जेई का टीका लगाया गया जिससे कि सभी बच्चे जापानी इंसेफेलाइटिस &lpar;जेई&rpar; से सुरक्षित रह सकें।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>टीका लगाने से बच्चों में होता है रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि जन्म के बाद से बच्चों को विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होने का खतरा बना रहता है। यही शिशुओं के मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। नियमित टीकाकरण के माध्यम से बच्चों को सभी टीका लगाने से उनके शरीर में उन बीमारियों से लड़ने की क्षमता का विकास होता है। टीकाकरण से बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है जो उनके शरीर में प्रवेश करने वाले विभिन्न बीमारियों को अपना घर बनाने से पहले ही समाप्त कर देता है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>टीकाकरण से बच्चों को शुरुआत में ही होने वाले विभिन्न बीमारियों जैसे हेपेटाइटिस&comma; चेचक&comma; जेई आदि से लड़ने के लिए शरीर में प्रतिरोधक क्षमता का विकास हो जाता है और बच्चे भविष्य में ऐसी बीमारी के संक्रमण से सुरक्षित रह सकते हैं। सिविल सर्जन डॉ चौधरी ने बताया कि एनएफएचएस-05 की रिपोर्ट के अनुसार पूर्णिया जिले में 12 से 23 माह के 81&period;8 प्रतिशत बच्चों द्वारा सम्पूर्ण टीकाकरण किया जा चुका है। शत प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए सभी स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिया गया है जिससे कि जिले के सभी बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके और बच्चे सभी बीमारियों से सुरक्षित रह सकें।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>दो वर्ष तक बच्चों को लगाया जाता है छः टीका &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डीएमएनई आलोक कुमार ने बताया कि बच्चों को जन्म होने से पूर्व माँ के गर्भावस्था से ही विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए टीका लगाया जाता है। गर्भावस्था में महिलाओं को टीडी-1&comma; 2 और बूस्टर डोज लगाया जाता है। बच्चों के जन्म पर उन्हें ओपीवी-0&comma; बीसीजी और हेपेटाइटिस-बी का टीका लगाया जाता है। बच्चों को टीका का दूसरा डोज 06 सप्ताह में ओपीवी-1&comma; रोटा-1&comma; एफआईपीवी-1&comma; पेंटावैलेन्ट-1 और पीसीवी-1 के रूप में लगाया जाता है। फिर बच्चों के 10 सप्ताह होने पर उन्हें ओपीवी-2&comma; रोटा-2 और पेंटावैलेन्ट-2 दिया जाता है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फिर 14 सप्ताह में बच्चों को ओपीवी-3&comma; रोटा-3&comma; एफआईपीवी-2&comma; पेंटावैलेन्ट-3 और पीसीवी-2 दिया जाता है। 09-12 माह के बच्चों को एमआर-1&comma; पीसीवी-बूस्टर और जेई-1 लगाया जाता है। 16-24 माह के बच्चों को ओपीवी बूस्टर&comma; एमआर-2&comma; डीपीडी बूस्टर-1 और जेई-2 लगाया जाता है। इसके बाद 5-6 वर्ष के बच्चों को डीपीडी बूस्टर-2&comma; 10 वर्ष होने पर बच्चों को टीडी-10 और 16 वर्ष होने पर बच्चों को टीडी-16 लगाया जाता है। इन सभी टीका का लाभ उठाने से बच्चे होने वाले विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रह सकते हैं और स्वस्थ रहते हुए अपना जीवन खुशहाल बिता सकते हैं।<&sol;p>&NewLine;

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