रमजान का आखिरी असरा खैर व बरकत का असरा : मिन्हाज आलम नदवी 

&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&lpar;अजित यादव&rpar;&colon;<&sol;strong> रमजान का पवित्र महीना चल रहा है। यह महीना इस्लामी कैलेंडर का नौवाँ महीना होता है। कुरान और हदीसों में इस महिने कि बहुत सारी खुबिया बताई गई है। यह महिना गुनाहों से माफी मांगने का महिना है। इस महिने में शैतानों का बेड़ियों में जकड़ दिया जाता है। जन्नत का दरवाजे खोल दिये जाते है और जहन्नम के बंद कर दिये जाते है। रमजान में रोजा को अल्लाह ताला ने सभी लोगों पर फर्ज किया है। à¤¹à¤° साल&comma; जैसे ही रमजान का चांद दिखाई देता है&comma; मस्जिदों के रंग बढ़ जाते हैं। पूजा और अनुष्ठान बढ़ने लगते हैं। रमजान का पवित्र महीना वैश्विक कोरोनावायरस से प्रभावित हो रहा है।<&sol;p>&NewLine;

Related posts

सनी देओल ने बेटे करण देओल के साथ पटना में किया ‘बंटवारा 1947’ का प्रमोशन, पटना साहिब गुरुद्वारे में टेका मत्था

जे०पी० गंगा पथ को मिलेगा विश्वस्तरीय स्वरूप 6.5 किलोमीटर गंगा चैनल विकसित होगा, समग्र विकास में तेजी के निर्देश : मुख्यमंत्री

विकसित बिहार के निर्माण में नई पीढ़ी की भूमिका सबसे अहम: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी