बच्चों के पोषण विकास की निगरानी के लिए संवर्धन कार्यक्रम का हो रहा संचालन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पूर्णिया&lpar;न्यूज क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए शुरुआत से ही उनके पोषण की स्थिति पर विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। जन्म के बाद से ही बच्चों को सही तरीके से पोषण नहीं मिलने पर बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> इसे दूर करने के लिए समेकित बाल विकास परियोजना &lpar;आईसीडीएस&rpar; द्वारा संवर्धन कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। संवर्धन कार्यक्रम के तहत समुदाय स्तर से ही बच्चों के पोषण स्थिति की जानकारी प्राप्त की जाती है तथा कमी होने पर उसमें सुधार कर बच्चों को सुपोषित किया जाता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> इस दौरान अतिकुपोषित बच्चों की भी समय रहते पहचान की जाती है और उन्हें विशेष चिकित्सकीय सहायता के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र &lpar;एनआरसी&rpar; भेजा जाता है। संवर्धन कार्यक्रम की शुरुआत बिहार में पूर्णिया जिले के के&period; नगर प्रखंड से हुई है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आईसीडीएस पूर्णिया को संवर्धन कार्यक्रम में बेहतर योगदान देने के लिए विभागीय स्तर पर पुरस्कृत भी किया गया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>संवर्धन कार्यक्रम के तहत कुपोषित बच्चों को समुदाय स्तर पर ही किया जा रहा सुपोषित<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आईसीडीएस डीपीओ रजनी गुप्ता ने बताया कि संवर्धन कार्यक्रम के तहत बच्चों की नियमित रूप से स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्रों पर जांच की जाती है। इस दौरान बच्चों के पोषण की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर उसे संवर्धन एप्प में जोड़ा जाता है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एप्प में उपलब्ध जानकारी के अनुसार बच्चों के पोषण स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक निर्देश जारी किया जाता है। उक्त निर्देश के आधार पर बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार की जाती है। इसके लिए बच्चों के अभिभावकों को भी आवश्यक सलाह व परामर्श दिया जाता है<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> जिससे बच्चों के खान-पान व मानसिक स्थिति की आवश्यक निगरानी की जा सके। समुदाय स्तर पर ही बेहतर पोषण उपलब्ध होने से बच्चों के शारीरिक व मानसिक स्थिति में आवश्यक सुधार नियत समय पर हो सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>संवर्धन योजना के द्वारा 90 प्रतिशत अतिकुपोषित बच्चों को किया जा सकता है स्वस्थ<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पोषण अभियान की जिला समन्वयक निधि प्रिया ने बताया कि संवर्धन योजना के द्वारा 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को स्वस्थ किया जा सकता है। इस योजना के द्वारा शुरुआत से ही बच्चों के पोषण के स्थिति की निगरानी की जाती है और बच्चों को आवश्यकता अनुसार पोषण उपलब्ध कराई जाती है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>संवर्धन योजना द्वारा समुदाय स्तर पर बच्चों की नियमित रूप से लंबाई के अनुसार वजन की जांच की जाती है। इसमें कमी होने पर बच्चों के पोषण गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है जिससे रोकथाम व प्रबंधन प्रक्रिया आसान हो सके और समय के साथ बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास में सुधार किया जा सके ।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> संवर्धन कार्यक्रम के तहत आईसीडीएस द्वारा सम्बंधित आंगनबाड़ी सेविकाओं को क्षमतावर्धन प्रशिक्षण भी दिया गया है। कार्यक्रम के सफल निष्पादन के लिए केंद्रों में दवाओं और अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>10 चरणों में किया जा रहा कार्यक्रम का संपादन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पोषण अभियान के जिला परियोजना सहायक सुधांशु कुमार ने बताया कि संवर्धन कार्यक्रम का 10 चरणों में संपादन किया जा रहा है। इसमें सामुदायिक स्तर पर लोगों का मोबिलाइजेशन&comma; बच्चों के पोषण स्थिति का आकलन&comma; चिकित्सकीय जांच&comma; भूख की स्थिति की जांच&comma; अतिकुपोषित बच्चों के प्रबंधन के तरीके&comma; दवाइयां&comma; पोषण&comma; पोषण की निगरानी&comma; स्वास्थय&comma; सुपोषित बच्चों का फॉलोअप आदि शामिल है । इसके संपादन के लिए आरोग्य दिवस पर बच्चों की देखभाल के साथ आंगनबाड़ी सेविकाओं व आशा कर्मियों द्वारा गृह भ्रमण कर अभिभावकों को आवश्यक परामर्श दिया जाता है।<&sol;p>&NewLine;

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