नए जेल में बंदियों को मिलेगी राहत, पुरानी जेल में घुट-घुट कर काट रहे थे जिंदगी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">जमुई&lpar;मो० अंजुम आलम&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> लंबे अरसे के बाद जमुई मंडल कारा में घुट-घुट कर जिंदगी गुजार रहे बंदियों को मंगलवार का दिन वरदान साबित हुआ और नये जेल में शिफ्ट होने के बाद बंदियों को नई जिंदगी मिल जाएगी।जिसका इन्तेजार कई वर्षों से बंदियों के साथ-साथ जेल प्रशासन को भी थी। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सोमवार की अहले सुबह जिलाधिकारी अवनीश कुमार सिंह&comma;एसपी डाक्टर शौर्य सुमन के अलावा अन्य पुलिस पदाधिकारियों के द्वारा मनियड्डा स्थित नए जेल के विधि व्यवस्था व सुरक्षा का जायजा लिया गया उसके बाद पुराने जेल से बंदियों को नए जेल में ले जाने की प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरी की गई। इसके लिए पुराने जेल से नए जेल तक चौक-चौराहों पर पुलिस जवान की तैनाती की गई थी। जमुई मंडल कारा में कई हार्डकोर नक्सली और सजायाफ्ता कैदी के अलावा कुख्यात अपराधी भी बंद हैं। सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक ना हो इसके लिए जिला व पुलिस प्रशासन पूरी तरह एलर्ट दिखी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दरअसल अंग्रेज के जमाने से बने जमुई जेल में सिर्फ 108 बंदियों की ही क्षमता थी लेकिन उसमें 836 बंदी रह रहे थे। पुराने जेल में बंदियों की स्थिति भेड़-बकरियों की तरह बनी हुई थी। जिसको लेकर सभी बंदियों को प्रशासनिक तैयारियां पूरी करने के बाद जमुई-लखीसराय मुख्य मार्ग पर मनियड्डा नव निर्मित जेल में शिफ्ट कराया गया जिसमें 1000 बंदियों के रहने की क्षमता है। जिस वजह से बंदियों को अब किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। बंदियों में 785 पुरुष और 51 महिला बंदी शामिल है।<&sol;p>&NewLine;

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