कलक्टर सिंह ‘केसरी’ जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई कवि-गोष्ठी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पटना&lpar;अजीत यादव&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> &&num;8220&semi;दिल था तो ज़ख़्म भी था&comma; कुछ कम न था &sol; तुम सा जो हकीम था कुछ ग़म ना था ।”&&num;8212&semi;&&num;8212&semi;- &OpenCurlyDoubleQuote;कभी मुस्कुराने को जी चाहता है &sol; कभी रो जाने का जी चाहता है&excl;” ऐसी ही मर्म-स्पर्शी पंक्तियों और गीत-ग़ज़लों से बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन आज गए शाम तक गुलज़ार रहा। अवसर था सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष प्रो कलक्टर सिंह &&num;8216&semi;केसरी&&num;8217&semi; की जयंती पर आयोजित कवि-सम्मेलन का।<br>सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद ने अपनी ग़ज़ल की इन पंक्तियों से कवि-सम्मेलन का आरंभ किया कि&comma; &OpenCurlyDoubleQuote;यहाँ सब ज़ख्म देते हैं&comma; ज़रा सी बात को लेकर&sol; किसी के दिल के ज़ख्मों को मिटाना किसको आता है&quest;”। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>गीतिधारा के प्रसिद्ध कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने पर्यावरण को विषय बनाते हुए कहा- तुम ही गतागत काल हो&comma; दृढ़ सत्य और प्रवाह हो&sol; जिस पर चले ये भुवन सकल &sol; तुम वही सुंदर राह हो&sol; तुम प्रबल रक्षक मनुज के&sol; प्राणी तुम्हारी गहें शरण&sol; पर्यावरण तुमको नमन &excl;”<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वरिष्ठ शायरा तलत परवीन ने अपनी इन पंक्तियों से तालियाँ बटोरी कि &&num;8211&semi; &OpenCurlyDoubleQuote;जो कहता है मुझ से कि मैं हूँ तुम्हारा&sol; उसे आज़माने को जी चाहता है। कभी मुस्कुराने को जी चाहता है&sol; कभी रूठ जाने को जी चाहता है।&&num;8221&semi;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अपने अध्यक्षीय काव्य-पाठ में सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने अपनी एक ताज़ा ग़ज़ल पढ़ी कि &OpenCurlyDoubleQuote;दिल था ज़ख़्म भी था&comma; कुछ कम न था&sol; तुम सा जो हकीम था कुछ ग़म न था&sol; तुम न हो तो कोई ख़ुशी ख़ुशी नहीं&sol; तुम थे पास तो कोई ग़म ग़म न था।&&num;8221&semi;। कवि जय प्रकाश पुजारी&comma; अर्जुन प्रसाद सिंह&comma;कुमार अनुपम&comma; चंद्र भूषण प्रसाद&comma; डा बी एन विश्वकर्मा&comma; शिवानन्द गिरि&comma; बाँके बिहारी साव&comma; अजीत कुमार भारती आदि कवियों ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया।<br>इसके पूर्व केसरी जी के प्रति श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए&comma; डा सुलभ ने कहा कि&comma; केसरी जी अद्भुत प्रतिभा के कवि और महान शिक्षाविद थे। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उनकी कारयित्री प्रतिभा बहुमुखी थी। वे अंग्रेज़ी के प्राध्यापक थे&comma; किंतु जिस मन-प्राण से उन्होंने हिन्दी की सेवा की&comma;उससे वे हिन्दी-सेवी ही माने गए। वे स्वयं में ही एक साहित्यिक-कार्यशाला थे। उनका सान्निध्य पाकर अनेक व्यक्तियों ने साहित्य-संसार में लोकप्रियता अर्जित की। केसरी जी साहित्य सम्मेलन तथा विश्वविद्यालय सेवा आयोग&comma; बिहार के भी अध्यक्ष रहे। वे समस्तीपुर महाविद्यालय के संस्थापक प्राचार्य थे। उनके कार्यकाल में समस्तीपुर नगर साहित्यिक-सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध था। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर&comma; नरेंद्र देव&comma; राम नारायण सिंह&comma; नंदन कुमार मीत&comma; दयानंद जायसवाल&comma; सुधा शरण सिंह&comma; रवीन्द्र कुमार सिंह&comma; अमन वर्मा&comma; साहिल कुमार&comma; अशोक कुमार डा आर पण्डित&comma; विजय कुमार&comma; श्री बाबू समेत बड़ी संख्या में काव्य-प्रेमी उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;

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