पटना मैनेजमेंट एसोसिएशन का संगोष्ठी : राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहन विमर्श

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; अजीत।<&sol;strong> पटना मैनेजमेंट एसोसिएशन और बिहार राज्य उत्पादकता परिषद ने आईसीएआर-आरसीईआर के सहयोग से &OpenCurlyDoubleQuote;भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा” विषय पर एक महत्वपूर्ण और सामयिक संगोष्ठी का आयोजन किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की शुरुआत में पटना मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट बसंत कुमार सिन्हा ने विषय का परिचय देते हुए अमेरिका के साथ हालिया टकराव&comma; उसके असर और भारतीय अर्थव्यवस्था&comma; विकास एवं रोज़गार पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मुख्य वक्ता के रूप में कर्नल आर&period;एस&period;एन&period; सिंह ने श्रोताओं को संबोधित किया। पूर्व खुफिया अधिकारी और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर परिचित चेहरा रहे सिंह ने भारतीय रक्षा बलों की तकनीकी दक्षता और &OpenCurlyQuote;ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान किए गए अभियानों का उल्लेख करते हुए भारत के वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा की क्षमता पर प्रकाश डाला।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि आज &OpenCurlyQuote;दुर्लभ मृदा खनिज’ &lpar;Rare Earth Minerals&rpar; किसी भी देश की ताकत और अंतरराष्ट्रीय वर्चस्व का प्रमुख आधार बन चुके हैं। इसी कारण यूक्रेन और बलूचिस्तान की भौगोलिक स्थिति अहम हो जाती है&comma; जबकि चीन अपने देश में इन खनिजों की लगभग 80 प्रतिशत उपलब्धता और उन्नत प्रसंस्करण तकनीक के दम पर वैश्विक प्रभाव जमाए हुए है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कर्नल सिंह ने यह भी कहा कि डॉलर की कमजोरी और अमेरिका की एकमात्र विश्व शक्ति के रूप में स्थिति पहले ही हिल चुकी है। आने वाले समय में बड़े देश अमेरिकी सैन्य-औद्योगिक ढांचे से दूरी बनाने की कोशिश करेंगे और कूटनीति तथा संसाधनशीलता नए विश्व-व्यवस्था की धुरी होंगे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने आंतरिक सुरक्षा को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया जितना बाहरी सुरक्षा को। उनके अनुसार भारत को माओवादी गतिविधियों&comma; जिहादी नेटवर्क और पश्चिमी वर्चस्व की चाह रखने वाले ईसाई समूहों से गंभीर चुनौतियों का सामना है&comma; क्योंकि इन तीनों की जड़ें वैश्विक नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं। इसके बावजूद उन्होंने भरोसा जताया कि भारत अपने लोगों के सहयोग और सरकार की रणनीति के साथ इन चुनौतियों का सामना करेगा और शीघ्र ही विश्व मंच पर निर्विवाद आर्थिक और राजनीतिक नेतृत्व स्थापित करेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम के समापन पर आईसीएआर-आरसीईआर के कार्यवाहक निदेशक ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि इस प्रकार के सार्थक आयोजन से वैज्ञानिकों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और उत्पादकता में सुधार होता है। संगोष्ठी में आईसीएआर-आरसीईआर के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के अलावा पीएमए और बीएसपीसी से जुड़े अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें इंजीनियर एम&period;के&period; दास&comma; डॉ&period; निर्मल कुमार&comma; पांडे&comma; संजय प्रसाद&comma; प्रबंधन विशेषज्ञ डॉ&period; ए&period;के&period; वर्मा&comma; डॉ&period; नीलेश नारायण प्रसाद समेत कई सदस्य शामिल हुए।<&sol;p>&NewLine;

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