सत्याग्रही पं0 जयनंदन झा के 46वीं पुण्यतिथि के अवसर पर परिचर्चा का आयोजन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>वैशाली&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> जिले के हाजीपुर जिला मुख्यालय स्थित गांधी आश्रम पार्क परिसर में बिहार के वैशाली से आजादी की लड़ाई में भाग लेने वाले सत्याग्रही स्वतंत्रता सेनानी पं जयनंदन झा की 46वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी स्मृति में पं0 जयनंदन झा फाउंडेशन द्वारा परिचर्चा&comma;काव्य श्रद्धांजलि सह उत्तराधिकारी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह का उदघाटन पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री संजय कुमार&comma; बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन&comma; पटना के अध्यक्ष डॉ अनिल सुलभ&comma; पद्मश्री विमल जैन&comma; देवचंद महाविद्यालय के प्राचार्य शिक्षाविद डॉ&period; तारकेश्वर पंडित&comma; मानवाधिकार पत्रकारिता के संवाहक डॉ शशि भूषण कुमार&comma; डॉ राजीव कुमार एवं पंडित जयनंदन झा फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ आनंद मोहन झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री संजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पं0 जयनंदन झा प्रजातांत्रिक मूल्यों के सच्चे समर्थक थे। उन्होंने आगे कहा कि जयनंदन झा को स्वतंत्र व संप्रभु भारत से कम कुछ मंजूर नहीं था। इसलिए उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की राष्ट्रभक्ति की विचारधारा से प्रेरित होकर आजादी की लड़ाई में सरकारी सेवा से त्यागपत्र देकर कूद पड़े। पं&period; जयनंदन झा भारत के प्रमुख सत्याग्रहियों में शुमार किए जाते है। हम सभी को उनके द्वारा बताएं मार्ग पर चलना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समारोह के अध्यक्ष डॉ अनिल सुलभ ने अपने संबोधन में कहा कि पं0 जयनंदन झा ने प्रजातंत्र की धरती वैशाली में जन्म लिया और उन्होंने अपने विचारों के माध्यम से देशवासियों को साहसी व पराक्रमी बनने का संदेश दिया है। पंडित जयनंदन झा ने स्वतंत्रता आंदोलनों में अहिंसावादी मार्ग को अपनाया और यह साबित किया कि सत्य व अहिंसा के पथ पर चलकर अपने गंतव्य तक पहुंचा जा सकता है।<br>उन्होंने आगे अपने संबोधन में कहा कि पं जयनंदन झा राष्ट्र के एक सच्चे कार्यकर्ता व न्याय प्रिय व्यक्ति थे। उनका व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली व प्रेरित करनेवाला है।<br>समाजसेवी रघुपति सिंह ने कहा कि पं&period; जयनंदन झा भारत को स्वतंत्र करने के प्रति प्रतिबद्ध थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलनों में अपना सबकुछ दांव पर लगाकर पूरे समर्पण के साथ भाग लिया था। उनके आग्रह पर ही महात्मा गांधी हाजीपुर आए थे और जहां पर उन्होंने प्रवास किया था&comma; उसे वर्तमान में गांधी आश्रम के नाम से जाना जाता है।समारोह के स्वागताध्यक्ष डॉ शशि भूषण कुमार ने कहा कि पं0 जयनंदन झा मानवतावाद व सामाजिक सद्भाव के समर्थक थे। वे गुलामी व दासता के घोर विरोधी थे। उन्होंने सत्याग्रही और अहिंसात्मक विचार को आत्मसात कर स्वतंत्र भारत के विचार को जन-जन तक पहुंचाया। पद्मश्री विमल जैन ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलनों में संपूर्ण सहभागिता होने के कारण जयनंदन झा पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चला। गांधी जी के निर्देश पर तत्कालीन सुप्रसिद्ध व महान कानूनविद पंडित मोतीलाल नेहरू तेज बहादुर सप्रू पटना आए और इन दोनों के पूर्ण समर्पण व कानूनी प्रयास से हाजीपुर में मुकदमे में पंडित झा की जीत हुई। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इनकी प्रेरणा से हाजीपुर देशभक्ति आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र बना। à¤•ार्यक्रम में उपस्थित डॉ&period; तारकेश्वर पंडित ने अपने संबोधन में कहा कि पं0 जयनंदन झा शिक्षाप्रेमी भी थे और वे शिक्षा को समस्या के समाधान के लिए एक रामबाण हथियार मानते थे । वे अपनी विचारों को कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत करते थे। इसलिए उन्हें कविराज के रूप में भी जाने जाता है। पूर्व सांसद प्रतिनिधि अवधेश सिंह ने कहा कि पंडित झा गांधीजी के सत्य व अहिंसा के विचार को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। डॉ राजीव कुमार ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा पं0 जयनंदन झा वर्ष 1920 में शिक्षक की सेवा से त्यागपत्र दे कर महात्मा गांधी के विचारों व समर्पण से प्रभावित होकर असहयोग आंदोलन में तन-मन-धन से भाग लिया और वैशाली जिले के राजापाकर गांव में प्रथम बार राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण भाषण दिया।उन्होंने पूर्वजों से सीखने व उनका आदर करने पर बल दिया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पं0 जयनंदन झा के पौत्र डॉ&period; आनंद मोहन झा ने कहा कि इस समारोह को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य समाज को भूले-बिसरे स्वतंत्रता सेवियों व उनके विचारों से परिचित कराना है ताकि हमसभी उन गौरवशाली व्यक्तित्व से कुछ सीख सके। हमारा संगठन निरंतर स्वतंत्रता सेवियों के परिवारजनों को हर संभव मदद करता रहा और आगे भी करता रहेगा। समारोह के विशेष अतिथि लेह के वायु सेना अधिकारी रवि भूषण ने कहा कि पं0 जयनंदन झा ने संपूर्ण बिहार में स्वतंत्रता की अलख जगाने का कार्य किया । उन्होंने गांधी जी के सत्याग्रह से लोगों को परिचय कराते हुए राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। उनकी नज़र में सबसे बड़ा धर्म व सेवा राष्ट्रसेवा है। वे बिहार के धरोहर थे। समारोह में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर आयोजित प्रतियोगिता के डी सी कॉलेज एवं ज्योति क्लासेज के निर्देशक इंजीनियर ज्योति भूषण के सैकड़ों बच्चों ने प्रतिभागी के रूप में भाग लिया था जिनमे प्रथम दो रागिनी कुमारी एवं सत्यम कुमार&comma;द्वितीय दो पुष्पांजलि एवं आर्यन चौहान तथा तृतीय दो आकांक्षा प्रसाद एवं आयुष्मान भारती को मेडल और विजेता प्रमाणपत्र दे कर सम्मानित किया गया।इसके साथ-साथ सभी प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>समारोह में पांच स्वतंत्रता सेनानी के परिवार से आए सदस्यों को स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी सम्मान &&num;8211&semi; 2024 से सम्मानित किया गया &colon;-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<ol class&equals;"wp-block-list">&NewLine;<li>स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय इश्वर सिंह मस्ताना के पुत्र लाल देव सिंह को<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय सुधा बिंदु मित्रा की नाती डॉ सुधांशु कुमार चक्रवर्ती को<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय राम नारायण राय के पुत्र वीरेंद्र कुमार को<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय रामदेव सिंह के पुत्र अनिल कुमार सिंह को<br>5&period;स्वतंत्रता सेनानी शहीद बेनीलाल भगत के पौत्र श् किशोर कुणाल नक्कू को<&sol;li>&NewLine;<&sol;ol>&NewLine;

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