कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई में बेहद मददगार साबित हो रहा है आरटीपीसीआर लैब का संचालन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon; <&sol;strong>वैश्विक महामारी के इस दौर में सदर अस्पताल परिसर में आरटीपीसीआर लैब का संचालन बेहद मददगार साबित हो रहा है। बीते सितंबर माह से जिले में लैब का संचालन शुरू होने के बाद कोरोना संबंधी जांच&comma; व संक्रमण के गंभीर मामलों का पता लगाना बेहद आसान हो चुका है। इधर महामारी के नये वैरिएंट सामने आने के बाद अचानक आरटीपीसीआर लैब का महत्व काफी बढ़ चुका है। दरअसल एंटीजन टेस्ट के जरिये नये वैरिएंट का पता नहीं चलता। इसके लिये आरटीपीसीआर जांच को प्रमुखता दी जा रही है। राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा आरटीसीआर जांच की संख्या में बढ़ोतरी का निर्देश भी विभाग को प्राप्त है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>आरटीपीसीआर संक्रमण की पहचान का सटीक व विश्वसनीय जरिया &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जानकारी देते हुए लैब में कार्यरत मेडिकल माइक्रोबॉयोलोजिस्ट डॉ धीरज कुमार बताते हैं कि आरटीपीसीआर जांच कोरोना संक्रमण की पहचान का एक सटीक और विश्वसनीय जरिया है। इसके जरिये मामूली रूप से संक्रमित होने का पता भी आसानी से लगाया जा सकता है। आरटीपीसीआर यानि रियल टाइम पोलिमर्स चेन रिएक्शन एक आण्विक परीक्षण है। जो आपके श्वसन नली के ऊपरी नमूनों का विश्लेषण करता है। यह कोरोना का कारण बनने वाले वायरस के अनुवांशिक सामग्री की खोज करता। संक्रमण का पता लगाने के मामले में यह अब तक स्वर्ण मानक परीक्षण साबित हुआ है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>प्रति दिन 02 हजार सैंपलों की होती है जांच &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अस्पताल परिसर स्थित आरटीपीसीआर लैब में हर दिन औसतन 02 हजार सैंपल की जांच की जा रही है । पीएचसी स्तर पर जांच के लिये संग्रह किये गये नमूनों के साथ व्यक्तिगत तौर पर लोग लैब पहुंच कर जांच को तरजीह दे रहे हैं। मेडिकल माइक्रोबॉयोलोजिस्ट डॉ धीरज बताते हैं कि लैब में 04 शिफ्ट में सैंपलों की जांच होती है। एक बार में 470 नमूना का परीक्षण संभव है। अमूमन एक शिफ्ट में जांच की प्रक्रिया पूर्ण होने में लगभग 04 से 05 घंटे का समय लगता है। नमूनों के सफल परीक्षण के लिये लैब में 08 टेक्निशियन व 02 एएनएम अलग अलग शिफ्ट में अपनी सेवा देते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>बिना लक्षण वाले मरीजों में संक्रमण का पता लगाने का बेहतर विकल्प &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ एमपी गुप्ता के मुताबिक संक्रमण के सिम्टेमेटिक मामलों का पता लगाना आसान होता है। कफ&comma; बुखार&comma; नाक से पानी आना&comma; गंध व स्वाद का खत्म होना&comma; बदन व सरदर्द&comma; कमजोरी व सांस लेने में तकलीफ कोरोना वायरस के सामान्य लक्षण हैं । ऐसे लक्षण वाले मरीजों का पता एंजीजन टेस्ट के जरिये भी आसानी से लगाया जा सकता है। लेकिन बिना किसी लक्षण वाले मरीजों में संक्रमण का पता लगाने का आरटीपीसीआर जांच एक बेहतर विकल्प है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>आम लोगों के लिये उपयोगी साबित हो रहा है लैब का संचालन &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विशेष महत्व के कार्यक्रम व समारोह में अपनी भागीदारी व हवाई यात्रा से पूर्व आरटीपीसीआर जांच अनिवार्य हो चुका है। मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भाग लेने के लिये अपनी जांच कराने लैब पहुंचे शशिधर कुमार ने बताया कि पूर्व में नमूना संग्रह कर जांच के लिये मधेपुरा भेजने की मजबूरी थी। जहां से नतीजे प्राप्त होने में 04 से 05 दिन का वक्त लगता था। इससे संक्रमित का समुचित इलाज तो प्रभावित होता ही था साथ में जरूरतमंदों को रिपोर्ट के लिये लंबा इंतजार भी करना पड़ता था। लैब का संचालन शुरू होने के बाद महज 05 घंटों में लोगों को रिपोर्ट उपलब्ध हो रहा है। जो लोगों के लिये बेहद सुविधाजनक साबित हो रहा है।<&sol;p>&NewLine;

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