आयरन सुक्रोज को लेकर एएनसी एवं ओपीडी में कार्यरत नर्सो को किया जाएगा प्रशिक्षित

&NewLine;<ul class&equals;"wp-block-list"><li>खून की कमी को रोकने में सहायक होती है प्रसव पूर्व जांच<&sol;li><li>गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में एनीमिया को दूर करने के लिए दिया जाता है आयरन सुक्रोज&colon; सिविल सर्जन<&sol;li><li>गर्भवती महिलाओं को दिया जाता है आयरन सुक्रोज&colon; डीटीएल<&sol;li><&sol;ul>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon;<&sol;strong> प्रसव के दौरान प्रसूता एवं नवजात शिशुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो&comma; यह गर्भावस्था के दौरान बेहतर स्वास्थ प्रबंधन पर निर्भर करता है। वहीं&comma; गर्भावस्था के दौरान बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाली रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। ऐसे में एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जांच &lpar;एएनसी&rpar; के प्रति महिलाओं की जागरूकता ना सिर्फ एनीमिया की रोकथाम में सहायक होती है&comma; बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान एनीमिया से संबंधित प्रबंधन का होना बहुत जरूरी होता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में खून की कमी उनके व उनके बच्चे के लिए नुकसानदायक है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को पूरा करने के लिए गर्भवती महिलाओं को आयरन और कैल्सियम की दवाओं के बाद अब आयरन सुक्रोज इंजेक्शन से गर्भवती महिलाओं में खून की पूर्ति करने की योजना बनाई गई है। हालांकि विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में ही गर्भवती महिलाओं को आयरन सुक्रोज इंजेक्शन को एनएस वार्टर में मिलाकर सलाइंस के द्वारा लगाया जाना है। इस संबंध में मातृत्व स्वास्थ्य की राज्य कार्यक्रम प्रबंधक डॉ सरिता द्वारा राज्य के सभी सिविल सर्जन को पत्र लिखकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया है। जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि आयरन सुक्रोज जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल&comma; अनुमंडलीय अस्पताल&comma; सीएचसी&comma; पीएचसी के मैटरनिटी इकाई एएनसी ओपीडी&comma; लेबर रूम&comma; ओटी में कार्यरत एएनएम&sol;जीएनएम को केयर इंडिया के सहयोग से प्रशिक्षण कराया जाना है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>गर्भावस्था में महिलाओं में एनीमिया की कमी को दूर करने को दिया जाता है आयरन सुक्रोज&colon; सिविल सर्जन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ एसके वर्मा ने बताया गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होने से गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है जबकिं प्रसव के दौरान विकट स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जच्चा-बच्चा को पूरी तरह से स्वास्थ्य लाभ देने के लिए ही समाधान किया गया है। ताकि जन्म व मृत्यु दर में कमी लायी जा सके। इसके लिए शरीर को हेल्दी और फिट रहने के लिए अन्य पोषक तत्वों के साथ-साथ आयरन की भी जरूरत होती है। आयरन ही हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है। क्योंकि कोशिकाएं ही शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने का काम करती हैं। हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर रक्त में आक्सीजन पहुंचाता है। इसलिए आयरन की कमी से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है और हीमोग्लोबिन कम होने से शरीर में आक्सीजन की कमी होने लगती है। इसकी वजह से कमजोरी और थकान महसूस होती है&comma; इसी स्थिति को एनीमिया कहते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>गर्भवती महिलाओं को दिया जाता है आयरन सुक्रोज&colon; डीटीएल<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>केयर इंडिया के डीटीएल आलोक पटनायक ने बताया रक्त की कमी से होने वाली एनीमिया की पहचान हीमोग्लोबिन लेवल जांच करने के बाद की जाती है। जिसको तीन भागों में विभक्त किया गया है। पहला हीमोग्लोबिन लेबल 10 ग्राम से ज्यादा है तो एनीमिया नहीं माना जाता है। जबकिं दूसरा हीमोग्लोबिन 7 ग्राम से 10 ग्राम होता है उसे मॉडरेट कहते हैं। यदि हीमोग्लोबिन 7 ग्राम से नीचे है तो उसे सीवियर एनीमिया माना जाता है। हीमोग्लोबिन 7 ग्राम से लेकर 10 ग्राम के बीच रहता है तो उस महिला को आयरन सुक्रोज का इंजेक्शन दिया जाता है। गर्भधारण के तीन महीने के बाद महिला को आयरन सुक्रोज दिया जाता है।<&sol;p>&NewLine;

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