मंकी पॉक्स वायरस को लेकर ज्यादा भयभीत होने की आवश्यकता नहीं

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">कटिहार&lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;mark><&sol;strong>&colon; मंकी पाक्स के प्रसार को देखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिया। इसके बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में है। मंकी पॉक्स को लेकर बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी से संबंधित जानकारियां हासिल करने में जुट गया है। स्वास्थ्य विभाग कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि त्वचा पर रोग के लक्षण दिखने पर रोगी को आइसोलेशन में रख कर इलाज करना है। इसके साथ ही संक्रमण के लिए सभी तरह की आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। इसके साथ ही पीपीई किट&comma; हैंड ग्लब्स तथा मास्क का इस्तेमाल करना जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल किए गए चादर&comma; कपड़े तौलिया जैसी दूषित सामग्री के संपर्क में आने से बचना चाहिए। नहाने वाला साबुन&comma; पानी या अल्कोहल युक्त हैंड सैनिटाइजर का उपयोग कर अपने हाथों को स्वच्छ रखना आवश्यक है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>जिला स्तर पर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल &lpar;एसओपी&rpar; के पालन करने का दिया गया निर्देश&colon; जिलाधिकारी<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिलाधिकारी उदयन मिश्रा ने बताया कि स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों को जिला स्तर पर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल &lpar;एसओपी&rpar; के पालन करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों को यह भी दिशा-निर्देश दिया गया है कि किसी भी तरह के मामले में अविलंब आवश्यक सलाह एवं उपचार की सुविधा मुहैया कराई जाए। हालांकि अभी तक जिले में मंकी पॉक्स का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद जिलेवासियों को इस संक्रमण के संबंध में आवश्यक जानकारी रखनी है। उन्होंने बताया कि चेचक का टीका मंकी पाक्स को रोकने में ल गभग 85 प्रतिशत प्रभावी साबित हुआ है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>शहर से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रखी जा रही है नजर&colon; सिविल सर्जन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ डीएन पाण्डेय ने बताया कि मंकी पॉक्स नामक वायरस को लेकर देश के सभी राज्यों के स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग सावधानी पूर्वक एहतियात बरतने में लग गई है। हालांकि इसको लेकर ज्यादा भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है&comma; क्योंकि अभी यह बीमारी हमारे जिले तक नहीं पहुंची है। शहर से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में नजर रखी जा रही है। यह बीमारी प्रत्यक्ष रूप से शारीरिक संपर्क&comma; शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ&comma; यौन संपर्क या घावों के संपर्क में आने और लंबे समय तक निकट संपर्क में आने पर सांस की बूंदों से संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से हो सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>वायरस की शुरुआत चेहरे से होकर पूरे शरीर में होने की प्रबल संभावना&colon; डीपीएम<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम डॉ किशलय कुमार ने बताया कि मंकी पाक्स के लक्षण के संबंध में यह बताया जा रहा है कि बार-बार तेज बुखार का आना&comma; पीठ और मांसपेशियों में जोड़ो का दर्द&comma; त्वचा पर दानें और चकते पड़ना&comma; खुजली की समस्या होना&comma; शरीर में सामान्य रूप से सुस्ती का आना हैं। हालांकि मंकी पाक्स की शुरुआत शरीर से नहीं बल्कि चेहरे से हो रही है। इस बीमारी का संक्रमण आमतौर पर 14 से 21 दिन तक रहता है। चेहरे से लेकर बाजुओं&comma; पैर एवं शरीर के अन्य हिस्सों पर रैशेस होना&comma; गला खराब होना और बार-बार खांसी आना इसके प्रमुख लक्षणों में हैं।<&sol;p>&NewLine;

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