दुर्लभ रोगों पर जागरूकता की नई पहल, एम्स पटना और आरडीआईएफ की संयुक्त कार्यशालाएं सफल

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित<&sol;strong>। पूर्वी भारत में दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत &OpenCurlyDoubleQuote;दुर्लभ रोग जागरूकता कार्यशालाओं” की श्रृंखला का सफल आयोजन 14 मार्च 2026 को कटिहार तथा 21 मार्च 2026 को रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान &lpar;रिम्स&rpar; में किया गया&period; इन कार्यशालाओं का आयोजन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान &lpar;एम्स&rpar; पटना और रेयर डिजीज़ इंडिया फाउंडेशन &lpar;आरडीआईएफ&rpar; के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इन कार्यक्रमों में चिकित्सकों&comma; संकाय सदस्यों और चिकित्सा विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण और सक्रिय भागीदारी देखने को मिली&period; कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ करना&comma; समय पर एवं सटीक निदान को बढ़ावा देना तथा प्रभावित मरीजों के लिए उपचार एवं सहायता तंत्र को अधिक प्रभावी बनाना था।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स पटना के विशेषज्ञों — डॉ&period; चंद्र मोहन&comma; डॉ&period; प्रताप पात्रा&comma; डॉ&period; सिद्धनाथ सुधांशु&comma; डॉ&period; प्रदीप कुमार&comma; डॉ&period; मनोज कुमार एवं डॉ&period; पुनीत कुमार चौधरी — ने दुर्लभ रोगों के निदान एवं प्रबंधन पर विस्तृत और ज्ञानवर्धक सत्र प्रस्तुत किए&period; उन्होंने विशेष रूप से &OpenCurlyDoubleQuote;नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिज़ीज़ेस 2021” &lpar;एनपीआरडी 2021&rpar; के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु व्यावहारिक रणनीतियों पर प्रकाश डाला। रिम्स&comma; रांची के विशेषज्ञों — डॉ&period; डी&period; के&period; सिन्हा&comma; डॉ&period; राजीव मिश्रा&comma; डॉ&period; पार्था चौधरी एवं डॉ&period; गाजी अहमद — ने चिकित्सा शिक्षा&comma; संस्थागत सहयोग और विशेषकर नवजात एवं बाल रोगियों में दुर्लभ रोगों के निदान से जुड़ी जटिलताओं पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए&period; उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में क्षमता निर्माण और संसाधनों के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर भी बल दिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण को भी प्रमुखता दी गई&period; आरडीआईएफ के सह-संस्थापक एवं निदेशक सौरभ सिंह ने दुर्लभ रोगों से प्रभावित मरीजों और उनके परिवारों के समक्ष आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया&period; उन्होंने उपचार तक समान और सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने के लिए क्राउडफंडिंग&comma; कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व पहलों तथा अन्य वित्तीय सहयोग तंत्रों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया&period;<br &sol;>इन कार्यशालाओं ने यह स्पष्ट किया कि दुर्लभ रोगों के प्रभावी निदान और प्रबंधन के लिए बहु-विषयक दृष्टिकोण&comma; सुदृढ़ संस्थागत सहयोग और निरंतर जागरूकता अभियान अत्यंत आवश्यक हैं&period; यह पहल न केवल चिकित्सा समुदाय में जागरूकता को नई ऊर्जा प्रदान करती है&comma; बल्कि दुर्लभ रोगों से प्रभावित व्यक्तियों के लिए एक अधिक सशक्त&comma; समावेशी और संवेदनशील स्वास्थ्य तंत्र के निर्माण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

मजदूर की मौत पर फूटा गुस्सा : मुआवजा और अंडरपास की मांग को लेकर एनएच पर बवाल…

शाम 6 बजे बेउर जेल से निकले अनंत सिंह

बकरी उत्सव–2026 में उमड़ा पशुपालकों का उत्साह, 52 प्रतिभागी और 200 बकरियों का भव्य प्रदर्शन