नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 127वीं जयंती मनायी गई

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना सिटी&comma; &lpar;न्यूज क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> आज़ाद हिंद फ़ौज़ का गठन कर ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध विद्रोह की चिंगारी पैदा करने वाले का नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 127वीं जयंती समारोह का आयोजन स्थानीय गाँधी सरोवर स्थित त्रिमूर्ति चौक पर किया गया।कार्यक्रम का आयोजन शहीद स्मारक न्यास &comma;टू०यू०सी०सी०-फारवर्ड ब्लॉक एवं साम्प्रदायिकप सद्भाव समन्वय समिति के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का शुभारंभ नेताजी सुभाषचंद्र बोस की चौक पर स्थापित प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि के साथ हुआ। कार्यक्रम के आरंभ में छात्र नेत्री सबीना ख़ातून द्वारा आज़ाद हिंद फ़ौज़ के प्रेरक गीत-&&num;8220&semi;क़दम &comma;क़दम बढ़ाए जा&comma;खुशी के गीत गाए जा &&num;8220&semi;के सस्वर गायन के साथ हुआ।मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए पूर्व पुलिस उपाधीक्षक विजय कुमार यादव ने कहा कि धर्म के मामले में नेताजी के विचार अनुकरणीय हैं।उन्होंने आगे कहा कि धर्म एक नितांत व्यक्तिगत मामला है तथा इसका इस्तेमाल राजनीतिक जीवन में नहीं होना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए वरीय समाजसेवी हरिहर प्रसाद सिन्हा ने कहा कि 23 जनवरी 1897 को कटक में अपने जन्म एवं 18 अगस्त 1945 को ताइपेह स्थित ताइहोकू में हवाई दुर्घटना तक नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जीवन सदियों तक हिंदुस्तानियों को प्रेरित और रोमांचित करता रहेगा। वरीय समाजसेवी संजीव कुमार यादव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए नेताजी की उस भावना से उपस्थित श्रोताओं को अवगत कराया कि केवल त्याग और संघर्ष द्वारा राष्ट्र के उत्थान की बुनियाद डाली जा सकती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> इस अवसर पर कॉ० नसीम अंसारी एवं बलराम चौधरी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा कहा कि सुभाषचंद्र बोस की लोकप्रियता एवं महानता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि गांधीजी के विरोध के बावजूद लगातार दो वर्ष क्रमशः1938 के हरिपुरा एवं 1939 के त्रिपुरी कांग्रेस महाधिवेशन में वे अध्यक्ष चुने गए।अपने अध्यक्षीय संबोधन में वरीय समाजसेवी डॉ० एक़बाल अहमद ने कहा कि नेताजी न केवल बड़े स्कॉलर थे बल्कि पूरे मुल्क को आंदोलित करने की उनमें जबरदस्त काबिलियत भी थी। उन्होंने आगे कहा कि यह यूँ ही नहीं था कि लार्ड माउंटबेटन ने यह स्वीकार किया था कि आज़ाद हिंद फ़ौज़ की आक्रामकता एवं मुंबई का नौसेना विद्रोह ने ब्रिटिश शासन को हिला कर रख दिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर कॉ०बलिराम विश्वकर्मा&comma; गोविंद कनोडिया&comma; शम्भू मेहता&comma; प्रफुल्ल पांडेय&comma; डॉ०राजीव गंगौल&comma; राजेश शुक्ला टिल्लू&comma; प्रशांत सुमन&comma; कॉ०मिथिलेश सिंह&comma; शैलेंद्र कुमार मुन्ना&comma; श्याम कुमार मिश्रा&comma; सुजीत कुमार कसेरा&comma; आलोक चोपड़ा&comma; संजय रॉय&comma; अंजू सिंह&comma; ललन यादव&comma; मुनेश्वर शर्मा मुन्ना&comma; रघुनाथ प्रसाद&comma; विकास कुमार टिंकू&comma; हर्षा मिश्र&comma; योगेंद्र कुमार ओम&comma; महेश चंद्रवंशी&comma; दीपकमल&comma; मोहित कुमार&comma; अमृतांशु शेखर&comma; राजीव कुमार आदि उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>लोगों में नेताजी के बारे में जागरूकता पैदा करने हेतु उनके जीवन और उपलब्धियों पर आधारित <em>प्रश्नमंच<&sol;em> का भी आयोजन किया गया जिसमें सही उत्तर देनेवाले विजेताओं को नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन शहीद स्मारक न्यास के महासचिव विजय कुमार सिंह ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कॉ० रामनारायण सिंह ने किया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित देशभक्तों ने &&num;8216&semi;नेताजी सुभाष बोस के साथ ही राष्ट्र के पचास अन्य शीर्ष शहीदों और राष्ट्र- नायकों का जयघोष कर कार्यक्रम का समापन किया।<&sol;p>&NewLine;

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