बच्चों के विकास में माता की भूमिका सर्वोपरी : रामलाल सिंह

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर<&sol;strong> फारबिसगंज माता का वत्सलमयी रूप से बड़ा कोई रूप नहीं। बच्चों के विकास में माता की भूमिका सर्वोपरि होती है। माता परिवार तथा समाज की आदर्श निर्माता होती है। बच्चे में संस्कारों का सृजन माताओं का कर्तव्य है। हमें अपनी प्राचीन गौरवशाली परंपरा को पुन&colon; स्थापित करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन करके शिशु वाटिका के 12 आदर्श व्यवस्था को अपने-अपने विद्यालयों में लागू करना है। उक्त बातें गंगा सरस्वती शिशु मंदिर फारबिसगंज में आयोजित प्रांतीय शिशु वाटिका आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के चतुर्थ दिवस पर आचार्य दीदी जी को संबोधित करते हुए लोक शिक्षा समिति बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह ने कही।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा बालकों के अंदर पंचकोशीय विकास के लिए शरीर&comma;प्राण&comma;मन&comma;बुद्धि और आत्मा को एकाग्र करना आवश्यक है। हमारी संस्कृति को नष्ट करने के लिए बहुत बड़ा षड्यंत्र किया गया। जो अच्छा है उसे स्वीकारें लेकिन अपने स्व को बचाए रखना उतना ही आवश्यक है। आज परिवार व्यवस्था बिखरता हुआ जा रहा है। संयुक्त परिवार आज बहुत कम देखने को मिलता है। संयुक्त परिवार भारतीय समाज की महत्वपूर्ण विशेषता है। दुःखद यह है कि आधुनिक समय में असीमित भौतिक सुविधाओं की चाह के कारण भारतीय समाज संयुक्त परिवार से दूर होते जा रहे हैं।<br>विद्या भारती एवं राष्ट्रभक्त शिक्षा शास्त्रियों का यह स्पष्ट मत है कि शिक्षा तभी व्यक्ति एवं राष्ट्र के जीवन के लिए उपयोगी होगी जब वह भारत के राष्ट्रीय जीवन दर्शन पर अधिष्ठित होगी जो मूलतः हिन्दू जीवन दर्शन है। अतः विद्या भारती ने हिन्दू जीवन दर्शन के अधिष्ठान पर भारतीय शिक्षा दर्शन का विकास किया है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>हमें ऐसी पीढ़ी का निर्माण करना है जो अपने जीवन के समस्त चुनौतियों का सामना करते हुए हिंदू जीवन शैली जी सकें। शिशु वाटिका में बच्चों को उचित स्नेह-प्रेम&comma;सम्मान&comma; प्रोत्साहन एवं संरक्षण की जरूरत पड़ती है। हमें बालकों को खेल-खेल में सामूहिक जीवन जीने की कला सिखानी है।<br>इस अवसर पर शिशु वाटिका के क्षेत्र प्रमुख मंजू श्रीवास्तव&comma; सह क्षेत्र प्रमुख नमीता वर्मा&comma; शिशु वाटिका के प्रांत संरक्षक रमेश चंद्र शुक्ल&comma; शिशु वाटिका प्रांत प्रमुख मिलन साह&comma; विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुमार विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य आशुतोष मिश्र समेत उत्तर बिहार प्रांत के 22 जिले के सैकड़ो आचार्य दीदी जी उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;

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