लक्ष्मी बाई – जन्म जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में याद की गई महारानी लक्ष्मीबाई

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">यूपी&comma; न्यूज क्राइम 24<&sol;mark><&sol;strong>। में प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम की सबसे तेजस्वी ज्वाला थीं लक्ष्मी बाई &&num;8211&semi; जन्म जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में याद की गई महारानी लक्ष्मीबाई भारत समृद्धि के तत्वावधान में जन्म जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में महारानी लक्ष्मी बाई को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए और उनके जीवन से संबंधित अनेक वीरोचित घटनाओं का स्मरण किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि उप्र विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष मा हृदय नारायण दीक्षित थे तथा मुख्य वक्ता ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे थे। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि डॉ&period; सी&period;के कंसल&comma; श्यामजी त्रिपाठी &lpar;सदस्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग उ&period;प्र&rpar;&comma; श्रीमती पुष्प लता अग्रवाल &lpar;संस्थापक अध्यक्ष सेंट जोसेफ विद्यालय समूह लखनऊ&rpar;&comma; प्रोफेसर बृजेन्द्र पांडे&comma; राजनीति शास्त्र विभाग&comma; विद्यांत हिंदू पीजी कालेज व कार्यक्रम अध्यक्ष राम कुमार वर्मा &lpar;अध्यक्ष व्यापार मंडल&rpar; उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रीना त्रिपाठी और धीरज उपाध्याय के कुशल संचालन से हुआ।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मुख्य वक्ता शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि जब प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की बात होती है तो असंख्य योद्धाओं का स्मरण करना जरूरी है जिन्होंने अपने प्राणों का उत्सर्ग कर स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया। महारानी लक्ष्मीबाई के साथ मुख्य रूप से नाना साहेब पेशवा&comma; बहादुर शाह जफर&comma;वीर कुंवर सिंह&comma; तात्या टोपे&comma; तोपची गौस खां&comma; मौलवी अजीमुल्ला बेगम हजरत महल का स्मरण किये बिना इस महान क्रांति को नही समझा जा सकता। किन्तु महारानी लक्ष्मीबाई के बिना 1857 की क्रान्ति का इतिहास लिखा ही नहीं जा सकता।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा अंग्रेजों के प्रबल सेनापति जनरल ह्यूरोज को सपने में भी लक्ष्मीबाई का पराक्रम दिखता था। उसके उद्गार थे -लक्ष्मीबाई विद्रोहियों में सर्वाधिक वीर और सर्वश्रेष्ठ दर्जे की सेनानी थीं।&&num;8221&semi; वीर सावरकर ने लिखा &&num;8211&semi; 1857 में मातृभूमि के हृदय में जो ज्योति प्रज्वलित हुई&comma; उसने आगे चलकर विस्फोट कर दिया&comma; सारा देश बारूद का भंडार बन गया&comma;हर ओर संघर्ष और युद्ध का तांडव होने लगा।यह ज्वालामुखी का विस्फोट था किंतु बाबा गंगादास की कुटिया के पास 18 जून 1858 को जली चिता की ज्वाला 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के ज्वालामुखी से निकली सबसे तेजस्वी ज्वाला थी।&&num;8221&semi;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>महारानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार से समाज में और अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया जिसने ग्राम ककौहा पोस्ट रानी लखनऊ से मालती देवी को बेटियों की शिक्षा और संस्कार हेतु कार्य करने हेतु&comma; मनीपाल पब्लिक स्कूल से डा&period;प्रदिप्ता चटर्जी को बेटियों को शिक्षा और नैतिक मार्गदर्शन देने हेतु&comma; डॉक्टर बंदिता सिंह को बेसिक के स्कूलों को हरे-भरे पौधे दान करने व बच्चों को पर्यावरण की शिक्षा देने हेतु&comma; डा मिथिलेश सिंह को बच्चों की निशुल्क गंभीर बीमारियों से चिकित्सा करने हेतु शिक्षिका नसीम सेहर को गांव के गरीब बच्चों को पढ़ाई हेतु प्रोत्साहित करने&comma;स्क्वाड्रन लीडर राखी अग्रवाल को निराश्रित बच्चों की सहायता और शिक्षा में योगदान हेतु&comma; सम्मानित किया गया साथ ही गीता वर्मा&comma; आभा शुक्ला&comma;रेनू त्रिपाठी&comma; सुमन दुबे&comma; बेसिक के स्कूलों में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थिति व संगोष्ठी में प्रतिभा करने हेतु डॉन बॉस्को आश्रय के बच्चों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। कोषाध्यक्ष व वरिष्ठ संस्थापक त्रिवेणी मिश्र ने सभी अतिथियों और आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापन किया।संगोष्ठी में संस्था और क्षेत्र के गणमान्य लोगों में त्रिवेणी मिश्रा&comma; सूर्यप्रकाश उपाध्याय एडवोकेट&comma; ओपी सक्सेना सीए&comma; पूर्व पार्षद कमलेश सिंह आदि मौजूद थे I<&sol;p>&NewLine;

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