खत्री सभा बिहार ने मनाई राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की जयंती और देवकीनंदन खत्री की पुण्यतिथि

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> खत्री सभा बिहार के द्वारा शुक्रवार को भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की जयंती और हिंदी के प्रथम तिलिस्मी लेखक बाबू देवकीनंदन खत्री की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। यह आयोजन पटना के सदर गली स्थित पप्पू खत्री के आवास पर आयोजित हुआ&comma; जिसमें खत्री समाज के अनेक बंधुओं ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें सादर शत-शत नमन किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सभा की अध्यक्षता खत्री सभा बिहार के अध्यक्ष अनन्त अरोड़ा ने की। उन्होंने कहा कि राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन न केवल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे&comma; बल्कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका रही। साथ ही देवकीनंदन खत्री जैसे साहित्यकारों ने हिंदी भाषा को आमजन तक लोकप्रिय बनाने में अहम योगदान दिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>देवकीनंदन खत्री की चर्चित रचनाएं – चंद्रकांता&comma; चंद्रकांता संतति&comma; काजर की कोठरी&comma; नरेंद्र-मोहिनी&comma; कुसुम कुमारी&comma; वीरेंद्र वीर&comma; गुप्त गोदना और कटोरा भर को स्मरण करते हुए उन्हें हिंदी तिलिस्मी उपन्यास का जनक बताया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी खत्री बंधुओं ने &OpenCurlyDoubleQuote;अमर रहें” के नारों के साथ श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर खत्री सभा के महासचिव पप्पू खत्री&comma; भूषण खत्री&comma; अनूप टंडन&comma; संदीप खत्री&comma; धनंजय खत्री&comma; अमर खत्री&comma; शिव पूजन जी&comma; अंकित खत्री सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे। सभी ने इस आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।<&sol;p>&NewLine;

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