जैनियों ने मनाया तीर्थंकर चंद्रप्रभु और पार्श्वनाथ स्वामी का जन्म-तप कल्याणक महोत्सव

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पटना सिटी&comma; &lpar;न्यूज क्राइम 24&rpar; <&sol;mark><&sol;strong>जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर चंद्रप्रभु स्वामी और 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव जैन समुदाय ने रविवार को हर्षोल्लासपूर्वक मनाया। इस अवसर पर हाजीगंज स्थित करीब 500 वर्ष प्राचीन श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर और खाजेकलां स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन अतिशय मंदिर में धार्मिक आयोजन धूमधाम से किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रवीण जैन ने बताया कि जैन तीर्थंकर के जन्म व तप कल्याणक महोत्सव पर प्रातः भगवान के प्रतिमा जी पर मंगल अभिषेक&comma; शांतिधारा के पश्चात विधान करते हुए विभिन्न पूजा-अर्चना जैन श्रद्धालुओं ने किया। भक्ति-भजन के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान चंद्रप्रभु और पार्श्वनाथ स्वामी के महिमा का उच्चारण किया। आयोजन में काफी संख्या में जैन समाज शामिल होकर प्रभु की आराधना की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>कष्टों में भी समता भाव धारण करने की प्रेरणा है जैन तीर्थंकर का जीवन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मीडिया प्रतिनिधि प्रवीण जैन ने बताया कि 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु जी और 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का जन्म करीब 3000 वर्ष पूर्व काशी नगरी बनारस के राजघराने में हुआ था। जिन्होंने अपने तपस्या काल में बहुत उपसर्ग सहा है। तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जीवन कष्टों में भी समता भाव धारण करने का एक महान उदाहरण है। हमें उनसे प्रेरणा मिलती है कि कष्ट और विपत्ति में भी हम कैसे दुखों से बाहर निकल सकते है और अपना जीवन सुखी बना सकते है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वहीं चंद्रप्रभु जी को तप के लिये बढ़ते देख 1000 राजाओं ने भी जैन दीक्षा ग्रहण की और पारसनाथ प्रभु को तप की ओर बढ़ते देख 300 राजाओं ने जैनेश्वरी दीक्षा को अंगीकार किया।तीर्थंकर चंद्रप्रभु को 3 माह वहीं तीर्थंकर पार्श्वनाथ को 4 माह तप के बाद कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। दोनों ने सम्मेद शिखर जी पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया था।<&sol;p>&NewLine;

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