इस्कॉन के 30 फुट का रथ रहेगा आकर्षण का केंद्र

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>धनबाद&lpar;न्यूज साभार&rpar;<&sol;strong>&colon; रथ यात्रा में तीन दिन ही शेष बचे हैं&period; इस बार एक जुलाई को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा है&period; प्रत्येक वर्ष आषाढ़ शुल्क पक्ष की द्वितीया रथयात्रा निकाली जाती है&period; इस दिन भगवान जगन्नाथ भक्तों से मिलने नगर भ्रमण को निकलते हैं&period; यूं तो रथयात्रा ओडिशा में लोकप्रिय है&comma; पर कोल सिटी धनबाद में भी कम प्रचलित नहीं है&period; जिन स्थानों से रथ यात्रा निकलती है वहां तैयारियां अंतिम चरण में हैं&period; इस बार शहर में चार स्थानों से रथ यात्रा निकाली जाएगी&period; पहली बार ऐसा हो रहा है जब इतनी संख्या में धनबाद से रथ यात्रा निकल रही है&period; दो स्थानों से तो पुरी की तर्ज पर रथ यात्रा निकाली जाएगी&period; वहीं पहली बार मांझेरपाड़ा से रथयात्रा निकाली जाएगी&period;जबकि हीरापुर हरि मंदिर में जगन्नाथ की प्रतिमा नहीं है&comma; इसलिए वर्षो से यहां लड्डू गोपाल को रथ पर बैठाकर रथ यात्रा निकाली जाती है&period;पूरे क्षेत्र में लड्डू गोपाल को रथ पर बैठाकर घुमाया जाता है और मासीबाड़ी पहुंचाई जाती है&period; श्रद्धालूओं को उत्साह देखते ही बनता है&period; यहां बता दें कि धनबाद में करीब पांच हजार उड़िया परिवार हैं जो प्रत्येक वर्ष रथयात्रा में शामिल होते हैं&period;मालूम हो कि रथयात्रा से एक दिन पहले नेत्र उत्सव मनाया जाता है&period; नेत्र उत्सव के दिन भगवान अपनी आंखें खोलते हैं&period; इस बार गुरुवार को नेत्र उत्सव पड़ रहा है&period; नेत्र उत्सव में मंदिर का पट आम लोगों के लिए खुलेगा और भगवान भक्तों को दर्शन देंगे&period; दरअसल&comma; ज्येष्ठ की पूर्णिमा के दिन से मंदिर का पट भक्तों के लिए बंद हो जाता है&period; ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ की पूर्णिमा के दिन से भगवान बीमार हो जाते हैं जो नेत्र उत्सव के दिन आंखें खोलते हैं&period; नेत्र उत्सव के दूसरे दिन रथयात्रा निकलती है&period;धनबाद में रथयात्रा का इतिहास बहुत पुराना है&period; झरिया शहर की रथयात्रा काफी प्रचलित व पुरानी है&period; सन 1932 से झरिया में रथ यात्रा निकल रही है&period; धनबाद शहर में भी धीरे-धीरे काफी प्रचलित होती जा रही है&period; धनबाद शहर में हीरापुर व धनसार से रथयात्रा निकलती है&comma; जिसमें धनसार जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा आकर्षक का केंद्र होता है&period; मालूम हो कि धनसार अनुग्रह नगर का भगवान जगन्नाथ का मंदिर है जिसकी स्थापना 22 साल पहले वर्ष 1996 में हुई थी&period; जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा की तैयारी जोरशोर से चल रही है&period;पुरी की तर्ज पर जगन्नाथ मंदिर धनसार से रथ निकलती है&period; शहर के गण्मान्य व्यक्ति रथ के आगे झाडू लगाते हैं&period; काफी संख्या में श्रद्धालूओं का जुटान होता है&period; रथ यात्रा धनसार से निकलकर बैंक मोड़ होते हुए बिरसा मुंड़ा चौक&comma; झरिया पुल &comma; पानी टंकी&comma; जोड़ाफोटक होते हुए मासीबाड़ी को जाता है&period;पहली बार मांझेरपाड़ा से निकलेगा रथ रेलवे इंस्टिच्यूट स्थित मांझेरपाड़ा क्लचरल युनिट रथ यात्रा निकालेगा&period; दुर्गा मंडन परिसर में इसी माह जगन्नाथ भगवान&comma; बलभद्र और बहन सुभ्रदा की प्राण प्रतिष्ठा कर प्रतिमा की स्थापना की गई है&period; पुरी की तर्ज पर यहां से एक जूलाई को रथ यात्रा विधिवत निकाली जाएगी&period; संध्या चार बजे प्रभु की रथ यात्रा निकाली जाएगी&period; दुर्गा मंदिर से निकल कर सिनेमा रोड&comma; हरि सभा&comma;पुराना बाजार काली मंदिर&comma; होते हुए श्रीश्री काली मंदिर तक जाएगा&period;इस्कॉन के 30 फुट का रथ रहेगा आकर्षण का केंद्र इस्कॉन धैया सेंटर द्वारा 30 फुट का विशेष रथ निकाला जाएगा&period; इसे आईआईटी धनबाद और बीआईटी सिंदरी के छात्रों ने मिलकर बनाया है&period; यह मोटर युक्त रथ धनबाद की ट्रैफिक और झूलते तारों के बीच खुद को एडजस्ट कर लेगा&period; रथ यात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए इस्कॉन की पुरी टीम लगी हुई है&period;इस्कॉन धनबाद मंदिर से एक जुलाई को सरायढेला स्टील गेट के जगन्नाथ हॉस्पिटल से निकलेगा&period; स्टील गेट&comma; चुना गोदाम&comma; थाना मोड़&comma; पीके रॉय&comma; होते हुए हीरापुर हटिया व रनणधीर वर्मा चौक पहुंचेगा&period; यहां से रथ को एसएसएलएनटी होते हुए धनबाद क्लब तक पहुंचेगी&period; संध्या में धनबाद क्लब में रथ यात्रा महोत्सव का आयोजन है&period;सात दिनों तक मौसीबाड़ी में रहते भगवान जगन्नाथ&comma; बलभद्र व सुभद्रा रथयात्रा से सात दिनों तक मौसीबाड़ी में रहते हैं&period; रथ को नगर भ्रमण कराकर मौसी बाड़ी लाया जाता है&period; सात दिनों तक भगवान जगन्नाथ&comma; बलभद्र व सुभद्रा यहीं रहते हैं&period; सात दिनों बाद वापसी यात्रा यानि बाहुड़ा यात्रा निकाली जाती है&period; वापसी यात्रा से तीनों को मंदिर में लाया जाता है&period;<&sol;p>&NewLine;

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