कुष्ठ रोगियों को समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की हो रही पहल

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">अररिया&comma; रंजीत ठाकुर।<&sol;mark><&sol;strong> जिले में कुष्ठ रोगियों को समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जरूरी पहल की जा रही है। इसके लिये विशेष अभियान संचालित कर संभावित कुष्ठ रोगियों को चिह्नित करने का कार्य किया जा रहा है। अभियान के क्रम में शहरी इलाकों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रोगियों की खोज के लिये जिले में दो सदस्यीय 2550 टीम बनायी गयी है। प्रत्येक 20 टीम पर एक सुपरवाइजर बहाल किया गया है। एसीएमओ डॉ राजेश कुमार व कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के एरिया कॉर्डिनेटर सत्यदेव यादव सहित अन्य विभागीय अधिकारी इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>जिले में कुष्ठ के कुल 306 मरीज इलाजरत –<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एसीएमओ डॉ राजेश कुमार ने बताया कि जिले में फिलहाल कुष्ठ के 306 मरीज इलाजरत हैं। मरीजों को नियमित अंतराल पर जरूरी चिकित्सकीय जांच व नि&colon;शुल्क दवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि संभावित मरीजों की खोज के लिये जिले में संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं द्वारा विशेष अभियान संचालित है। अभियान के क्रम में संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं द्वारा हाउस टू हाउस संभावित मरीजों को चिह्नित किया जा रहा है। ताकि जरूरी जांच के उपरांत उन्हें समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध करायी जा सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>शहरी क्षेत्र में मिल रहे हैं कुष्ठ के मरीज-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डीएनटी जेके रमण ने बताया कि हाल के दिनों में जिले में कुष्ठ के मामले बढ़े हैं। जिला के रानीगंज&comma; फारबिसगंज व जोकीहाट प्रखंड में कुष्ठ के सबसे अधिक मामले हैं। इतना ही नहीं अररिया शहरी क्षेत्र व इससे सटे इलाकों में भी कुष्ट के मामले सामने आये हैं। जो चिंताजनक है। शहरी इलाकों से रोग संबंधी मामले सामने आने के बाद शहरी इलाकों में संभावित रोगियों की खोज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>देर से चलता है रोग का पता-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रोगियों का कुष्ठ रोग का पता देर से चलता है। इससे इलाज संबंधी जटिलताएं बढ़ जाती हैं। इसलिये रोग के कारण व इसके लक्षणों के प्रति ज्यादा सतर्क व सावधान होने की जरूरत है। डीएनटी जेके रमण ने बताया कि शरीर के किसी भाग में किसी तरह का दाग व सुन्नपन रहने पर लोगों को तुरंत सचेत होकर नजदीकी अस्पताल में अपनी जांच करानी चाहिये। ताकि समय रहते इसे प्रभावी तौर पर नियंत्रित किया जा सके। संक्रमण से बचाव के लिये व्यक्तिगत स्तर पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। अपने आसपास के परिवेश के साथ इस्तेमाल में आने वाले कपड़े व चादर सहित दैनिक उपयोग में आने वाली चीजों को नियमित रूप से सफाई व इसे धूप में अच्छी तरह से सुखा कर उपयोग में लाया जाना जरूरी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सभी पीएचसी में जांच व इलाज का इंतजाम-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एसीएमओ डॉ राजेश कुमार ने बताया कि जिले के सभी पीएचसी में कुष्ठ रोग की जांच व इलाज का समुचित इंतजाम उपलब्ध है। इसलिये रोग से संबंधित किसी तरह का लक्षण दिखने पर तत्काल नजदीकी अस्पताल में लोगों को अपनी जांच करानी चाहिये। जांच व इलाज की सुविधा सरकार द्वारा नि&colon;शुल्क उपलब्ध करायी जाती है।<&sol;p>&NewLine;

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