मौसम में आयी तब्दीली के कारण बढ़ा मौसमी बीमारियों का प्रकोप

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर।<&sol;strong> मौसम में आयी तब्दीली के कारण जिले में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है&period; मौसम में लगातार जारी उतार-चढ़ाव लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है&period; बच्चे जहां सर्दी&comma; खांसी&comma; बुखार व वायरल निमोनियो की चपेट में आ रहे हैं&period; वहीं बुजुर्ग व सामान्य आयु वर्ग के लोग भी छाती में दर्द&comma; खांसी&comma; गले में संक्रमण&comma; शरीर में दर्द व थकान लिये अस्पतालों में इलाज के लिये पहुंच रहे हैं। महज सदर अस्पताल में ही दोनों शिफ्ट में संचालित ओपीडी में ही बड़ी संख्या में लोग सेहत संबंधी इन समस्या को लेकर इलाज के लिये पहुंच रहे हैं। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक हर दिन इलाज के लिये ओपीडी आने वाले करीब 40 प्रतिशत लोगों में इस तरह की समस्या देखी जा रही है। अस्पताल प्रबंधक विकास आनंद ने बताया कि ओपीडी में हर दिन 500 से अधिक मरीज इलाज के लिये पहुंचते हैं। इसमें अधिकांश मरीज मौसमी बीमारियों की शिकायत लेकर इलाज के लिये अस्पताल पहुंच रहे हैं। बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं हर आयु वर्ग के लोग<br>अस्पताल अधीक्षक डॉ केके कश्यम ने बताया कि मौसम में हो रहे बदलाव के कारण हर आयु वर्ग के लोग मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>तापमान में जारी उतार-चढ़ाव इसकी मुख्य वजह है&period; दिन में खिली धूप व रात में अचानक बढ़ी ठंड लोगों की सेहत को प्रभावित कर रहा है&period; मौसम में हो रहा उतार-चढ़ाव संक्रामक बीमारियों के प्रसार को बढ़ावा दे रहा है&period; लिहाजा इस मौसम में बच्चों को संक्रामक रोगों का खतरा अधिक होता है&period; इस मौसम में बच्चों के नाक से पानी आना&comma; सांसल लेने में तकलीफ&comma; कफ व खांसी व सोते समय सांसों में घर-घराहट की आवाज जैसी शिकायत आम है। शुरूआती अवस्था में उचित इलाज के अभाव में ये निमोनिया सहित अन्य गंभीर रोग का कारण बन सकता है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बच्चों की सेहत पर पड़ता है बदलते मौसम का अधिक असर सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ आकाश कुमार ने बताया कि बदलते मौसम का सबसे अधिक असर कम उम्र के बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है&period; बड़ों की तुलना में बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इसलिये वे आसानी से तरह-तरह के संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। बच्चों में अक्सर नाक से पानी आना&comma; सांस लेने में तकलीफ&comma; कफ-खांसी व सोते समय सांसों में घर-घराहट की आवाज जैसी शिकायत होती है। अगर शुरुआती दौर में ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो ये निमोनिया सहित अन्य गंभीर रोग का कारण बन सकता है&period;<br &sol;>सेहत के प्रति अधिक सतर्क रहने की है जरूरत<br &sol;>सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि इस बदलते मौसम में अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है&period; खास कर बच्चे व बुजुर्गों के मामले में ये अधिक जरूरी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ऐसे मौसम में शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ के सेवन को प्रमुखता देना चाहिये&period; हरी पत्तेदार सब्जी&comma; ऑवला सहित अन्य मौसमी फलों को सेवन अधिक करें&period; ताजा व सुपाच्य भोजन व हल्का गर्म पानी का सेवन संक्रमण की संभावना को कम करता है&period; धूप से आने पर अधिक ठंडे पानी के सेवन से परहेज करें&period; बच्चों की नियमित मालिस के साथ पूरे बांह वाले गर्म कपड़े पहनायें&comma; बाहर निकलने पर बच्चों का सिर व कान भी ढ़का होना चाहिये&period; इसके अलावा व्यैक्तिगत साफ-सफाई का ध्यान रखना भी विभिन्न संक्रामक रोगों के प्रभाव से मुक्त रहने के लिहाज से जरूरी है&period; अधिक परेशानी होने पर तत्काल नजदीकी अस्पताल इलाज कराना जरूरी है।<&sol;p>&NewLine;

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