बिहार में मक्का आधारित उद्योग के लिए अपार सम्भावनायें : श्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&lpar;अजीत यादव&rpar;&colon; <&sol;strong>बिहार सरकार के कृषि मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा की चावल और गेहूँ के बाद भारत में मक्का तीसरी सबसे महत्त्वपूर्ण फसल के रूप में उभर रहा है। बिहार में वर्ष 2020&amp&semi;21 में राज्य में मक्का का कुल उत्पादन 35-21 लाख मैट्रिक टन तथा उत्पादकता 52-29 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था। वर्ष 2015&amp&semi;16 तथा 2016&amp&semi;17 में मोटे अनाज &lpar;मक्का&rpar; के सर्वश्रेष्ठ उत्पादन एवं उत्पादकता के लिए भारत सरकार द्वारा कृषि कर्मण पुरस्कार से राज्य को सम्मानित किया गया। मक्का उत्पादन में बिहार देश में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देश के कुल मक्का उत्पादन में बिहार का योगदान लगभग 9 प्रतिशत है आंध्रप्रदेश कर्नाटक राजस्थान तथा महाराष्ट्र के बाद बिहार देश का 5वाँ सबसे बड़ा मक्का उत्पादक राज्य है। कृषि मंत्री श्री सिंह फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री &lpar;फिक्की&rpar; द्वारा आयोजित 8वाँ इण्डिया मेज सम्मिट&comma; 2022 के वर्चुअल उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि सरकार का प्रयास है कि बिहार को मक्का निर्यातक राज्य के रूप में विकसित किया जाये। राज्य में कुल उत्पादित मक्का का मात्र 8 प्रतिशत ही राज्य के अंदर उपयोग हो पाता है और अधिकांश उत्पादित मक्का राज्य के बाहर अन्य राज्यों में कच्चा माल के रूप में चला जाता है। सरकार राज्य के अन्दर मक्का आधारित उद्योगों की स्थापना की साथ-साथ आय बढ़ाने के लिए अन्य उपायों पर कार्य कर रही है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मक्का दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसलों में से एक है और यह अधिकांश विकासशील देशों में खाद्य सुरक्षा में योगदान देता है। उन्होंने कहा कि राज्य में मक्का का बीज प्रतिष्ठापन दर 95 प्रतिशत से अधिक है। रबी मक्का में लगभग 100 प्रतिशत संकर बीज का उपयोग किसानों द्वारा किया जाता है। गंगा के उत्तर और कोसी के दोनों तरफ पड़ने वाले जिले यथा पूर्णियाँ कटिहार भागलपुर मधेपुरा सहरसा खगड़िया और समस्तीपुर मक्का बेल्ट के रूप में उभरा है। इन जिलों में बड़े और छोटे किसानों द्वारा 50 क्विंटल प्रति एकड़ के दर से मक्का की उत्पादकता प्राप्त किया गया है&rsqb;जो विश्व के सर्वश्रेष्ठ मक्का उत्पादक अमेरिका के क्षेत्रों मिडवेस्ट हार्टलैंड इलिनोइस&rsqb;आयोवा और इंडियाना की तुलना में कहीं अधिक है। बिहार की सरकार राज्य में मक्का के उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को उनके फसलों का अधिक-से-अधिक मूल्य दिलाने के लिए कृतसंकल्पित होकर कार्य कर रही है। मंत्री ने बताया कि मछली का बाजार में बिहार तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए मक्का बीज उद्योग&rsqb;इथेनॉल&rsqb;मक्का तेल&rsqb;फीड और स्टार्च उद्योग&rsqb;जैव ईंधन&rsqb;खाद्य आधारित उद्योग और रेडी-टू-यूज भोज्य पदार्थ यानी आटा&rsqb;दलिया&rsqb;सत्तू&rsqb;टाॅफी&rsqb;स्नैक्स आदि आधारित उद्योगों में निजी क्षेत्र के निवेश के लिए विशाल क्षमता में मौजूद है। इनके अलावा&rsqb;राज्य में स्वीटकाॅर्न और बेबीकाॅर्न के निर्यात की काफी संभावनाएँ हैं। उन्होंने इस सम्मिट में उपस्थित सभी उद्योगपतियों एवं संस्थानों से बिहार में मक्का आधारित उद्योग लगाने की अपील किया। राज्य सरकार बिहार में निवेश करने हेतु इच्छुक सभी उद्यमियों का स्वागत करेगी तथा उन्हें उद्योगों की स्थापना हेतु हर संभव मदद करेगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने आगे बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पूर्णियाँ जिले में भारत के पहले इथेनाॅल संयत्र की स्थापना किया गया है। इस संयत्र की स्थापना ईस्टर्न इण्डिया बाॅयोफ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 105 करोड़ की लागत से बनाया गया है। बिहार में 17 इथेनाॅल संयत्र स्थापित करने की कार्रवाई की जा रही है&rsqb;जिनमें गन्ना के अवशेष&rsqb;मक्का और टूटे चावल का उपयोग करके हर साल 35 करोड़ लिटर ईधन उत्पादन करने की सम्भावना है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पूर्णियाँ के अलावा भोजपुर&rsqb;बक्सर&rsqb;गोपालगंज&rsqb; मुजफ्फरपुर नालंदा मधुबनी&rsqb;बेगूसराय&rsqb;पूर्वी चम्पारण तथा भागलपुर में इथेनाॅल संयत्र लगाने की कार्रवाई की जा रही है। श्री सिंह ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से द्वितीय कृषि रोड मैप के क्रियान्वयन के फलस्वरूप बिहार में कुक्कुट उद्योग में 15 से 20 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि हो रहा है। डेयरी उत्पादन सालाना 15 से 16 प्रतिशत के बीच बढ़ रहा है।<&sol;p>&NewLine;

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