कुंवारी लड़कियों पर रंग डाली तो करनी पड़ेगी शादी, नहीं मानी तो मिलेगी सजा

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>रांची&lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;strong> रंगों के त्योहार होली की देश भर में धूम है। हर तरफ रंग-गुलाल उड़ रहे हैं। लोग मस्ती में सराबोर हैं। पर क्या आप जानते हैं कि झारखंड का संथाल आदिवासी समाज 15 दिन पहले से ही यह त्योहार मनाने लगता है। ये समाज पानी और फूलों की होली खेलता है। संथाली समाज इसे बाहा पर्व के रूप में मनाता है। यहां की परंपराओं में रंग डालने की इजाजत नहीं है। इस समाज में रंग-गुलाल लगाने के सिर्फ खास मायने ही हैं। ऐसे में यहां का एक नियम ऐसा है कि हर कोई उससे बचकर रहना चाहता है।लड़की पर रंग डाला तो&period;होली के 15 दिनों तक समाज का कोई युवक किसी लड़की पर रंग नहीं डाल सकता। अगर वह किसी कुंवारी लड़की पर रंग डालता है तो समाज की पंचायत लड़की से उसकी शादी करवा देती है। अगर लड़की को शादी का प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ तो समाज रंग डालने के जुर्म में युवक की सारी संपत्ति लड़की के नाम करने की सजा सुना सकता है। यह नियम झारखंड के पश्चिम सिंहभूम से लेकर पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी तक के इलाके में प्रचलित है। इसी डर से कोई संथाल युवक किसी युवती के साथ रंग नहीं खेलता। परंपरा के मुताबिक पुरुष केवल पुरुष के साथ ही होली खेल सकता है।<&sol;p>&NewLine;

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