जातिगत टिप्पणी करके प्रजातंत्र को ठेस पहुंचाना घातक : गुरु प्रेम

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;mark><&sol;strong> प्रख्यात शिक्षाविद् एवं लोकहित पार्टी के संरक्षण के गुरु प्रेम ने कहा कि आज संसद का नया भवन देश के लोकतंत्र और प्रजातांत्रिक व्यवस्था में आस्था का नया मुकाम हासिल करने का काम किया है &period;ऐसे में महिलाओं को आरक्षण देकर केंद्र सरकार ने भारत की पुरखों से चली आ रहे महिलाओं के सम्मान देने की परंपरा का निर्वहन किया है&period; उन्होंने कहा कि ऐसे वक्त आज भी देश में कई हिस्सों में जातिगत टिप्पणी कर कुछ लोग भारत के प्रजातांत्रिक व्यवस्था और लोकतंत्र में आस्था रखने वाले को ठेस पहुंचाने का काम कर रहे हैं। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि पिछले दिनों राष्ट्रीय जनता दल के एक एमएलसी रामबली सिंह चंद्रवंशी एवं कर्पूरी ठाकुर के सुपुत्र डॉ&period; रविन्द्र के द्वारा तेली&comma; तम्बोली एवं दांगी जाति को अतिपिछड़ों के आरक्षण से वंचित किया जाय यह कहा गया है&comma; जो अत्यन्त ही दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुर्भावनापूर्ण है&period; हजारों वर्षों से अतिपिछड़ा वर्ग अपमान&comma; असुरक्षा एवं अभाव का दंश झेलता रहा है&period; जब थोड़ा सा सम्मान मिला तो फिर से कुछ सामंती सोच के नेता एव दल तेली&comma; तम्बोली एवं दांगी का हक छीनना चाहते हैं जो अब नहीं होगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>लोकहित अधिकार पार्टी के नेता राष्ट्रीय संरक्षक गुरुदेव श्री प्रेम&comma; वरिष्ठ अध्यक्ष डॉ&period; जगन्नाथ प्रसाद&comma; बिहार प्रदेश के उपाध्यक्ष एवं पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अजीत रंजन अपने संयुक्त बयान में रामबली सिंह चंद्रवंशी के कुत्सित विचार का जोरदार विरोध करते हैं एवं बताना चाहते हैं कि तेली&comma; तम्बोली एवं दांगी को आरक्षण के लाभ से वंचित करने की बात सोचना अंगारों पर चलने के बराबर सिद्ध होगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>नेताओं ने कहा कि दिनांक 19&sol;09&sol;23 को प्रजातंत्र के नए संसद मंदिर नए संसद भवन के शुभारंभ का ऐतिहासिक दिन है &period; जहाँ नया संसद भवन भारत के नव निर्माण की क्षमता&comma; वक्त के साथ आवश्यकताओं की दौड़ में पूर्ति के प्रतिक चिन्ह के रूप में स्वाभिमान के साथ आज खड़ा है वहीं हमारा पुराना संसद भवन आजादी के बाद भारत के नव-निर्माण की गौरव गाथा का राष्ट्रीय धरोहर का प्रतीक बन गया है&period; इतिहास एवं वर्त्तमान दोनों का ही राष्ट्रिय लोकहित अधिकार पार्टी करता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आदर भाव के साथ स्वीकार आशा है नया संसद भवन समाज के असम्मानित&comma; असुरक्षित एवं अभावग्रस्त जनता के प्रति समर्पित होगा &period; लोकहित पार्टी ने नई संसद भवन में महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा है कि 50 फीसदी आबादि देश-दुनिया में महिलाओं की है&period; यह सम्पूर्ण मानवता के लिए स्वागत योग्य है &period; लोकहित अधिकार पार्टी &&num;8216&semi;महिला आरक्षण विधेयक&&num;8217&semi; का समर्थन करती है एवं ध्यानाकर्षित करना चाहती है कि SC&sol;ST के तर्ज पर अति पिछड़ों को विधान सभा&sol; लोक सभा में पहुँचने के लिए सीटें सुरक्षित &sol; आरक्षित की जाए ताकि हजारों वर्षों से असुरक्षित&comma; असम्मानित एवं अभावग्रस्त अति पिछड़ों को नए भारत में भारत के नव-निर्माण में उचित स्थान मिल सके।<&sol;p>&NewLine;

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