फातमा के न्याय-यात्रा से घबराए बार काउंसिल के सदस्य जल्दी बाजी में ले लिया असंवैधानिक निर्णय

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटनासिटी&lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;&colon; <&sol;strong>बिहार राज्य बार काउंसिल ने मनमाने तरीके से अपने पद का दुरुपयोग करते हुए लोकतांत्रिक आवाज उठाने के कारण विधि विरुद्ध एवं असंवैधानिक निर्णय लिया है जिसका खंडन सुश्री शहनाज फातमा ने किया इनका आरोप है कि बार काउंसिल ने असंवैधानिक तरीके से मीटिंग में आने से रोक दिया ताकि ये लोग आसानी से मनमानी करते रहें कोई भी अधिवक्ता यदि विरोध करेगा तो तानाशाही रवैया अपनाते हुए उसे लाइसेंस कैंसिल एवं डी&period;सी चलाए जाने की धमकी दी जाती है जब एक बार काउंसिल की सदस्य उनके साथ ऐसा हो रहा है तो एक आम अधिवक्ताओं के साथ क्या होगा&quest; फातिमा के न्याय- यात्रा से घबराकर फातिमा को डराया जा रहा है ताकि मैं उनका विरोध ना करूं&comma; डर जाऊं&comma; अधिवक्ताओं के हित में आवाज उठाना छोड़ दूं सुश्री फातिमा का कहना है कि उन्होंने जब से बिहार का दौरा करना शुरू किया है बिहार के कई जिलों से अपार समर्थन एवं बार काउंसिल का विरोध हो रहा है जिसके कारण सदस्यों की घबराहट बढ़ चुकी है इसलिए बौखला कर विधि विरुद्ध एवं असंवैधानिक निर्णय बार काउंसिल ने ले लिया है फातमा ने कहा बी&period;सी&period;आई एवं बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा को अपना वोट दिया था और लोकतंत्र में जिस को वोट दिया जाता है उससे सवाल करने का अधिकार भी होता है फातमा के द्वारा किए गए सवाल हमेशा अधिवक्ताओं के हित में होते हैं एवं गुड फेथ उठाया गया आवाज किसी कानून में मिसकंडक्ट नहीं माना जाएगा क्योंकि इस देश में सभी नागरिक को एक समान लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकार हैं और अधिवक्ताओं की प्रतिनिधि होने के नाते कई मांग किए हैं जो जायज हैं बार काउंसिल एक निर्वाचित सदस्य को बैठक में आने से वंचित&comma; लाइसेंस कैंसिल&comma; एवं डी&period; सी किस प्रावधान के तहत चलाएगा फातिमा ने आरोप लगाया है कि बार काउंसिल अपने कुकृत्य को छुपाने एवं वकीलों को डराने की कोशिश कर रहा है ताकि वकील समाज डर जाए&comma;इनका विरोध या घेराव ना हो फातमा ने सवाल खड़े कर दिए कि 2006 से आज तक का ऑडिट क्यों नहीं हुआ क्यों वाउचर&comma;स्लिप गायब है ओवर राइटिंग&comma; कटिंग पेस्ट क्यों है फाइलें क्यों गायब है&comma;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>काउंसिल ने आज तक सिर्फ मुझ पर झूठे आरोप लगाए हैं लेकिन आज तक कोई भी प्रमाण मेरे खिलाफ बार काउंसिल ने प्रस्तुत नहीं किया है और ना ही आज तक जितने भी मैंने सवाल किए हैं उसका जवाब नहीं मिला इस कारण से फातिमा ने पटना उच्च न्यायालय में रिट भी दाखिल किया है न्यायालय एवं न्यायमूर्ति महोदय के निर्णय पर पूरा विश्वास है अधिवक्ताओं का अपार जनसमर्थन मिल रहा है इस कारण से काउंसिल में घबराहट और बेचैनी बढ़ी हुई है फातमा ने कहा कि विधि विरुद्ध प्रस्ताव पारित कर उन्हें डराया जा रहा है ताकि वकीलों की मुद्दों से भटक जाऊं परंतु मैं कभी भी मुद्दों से नहीं भटक सकती मेरी न्याय-यात्रा चलती रहेगी।<&sol;p>&NewLine;

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