गांधी मैदान में चार दिवसीय एग्रो बिहार मेला संपन्न, किसानों ने खरीदे आधुनिक कृषि यंत्र

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत। <&sol;strong>पटना के गांधी मैदान में कृषि विभाग बिहार और सीआईआई के सहयोग से आयोजित चार दिवसीय राज्यस्तरीय कृषि यांत्रिकरण मेला &OpenCurlyDoubleQuote;एग्रो बिहार 2026” का रविवार को समापन हो गया&period; 12 से 15 मार्च तक चले इस मेले में बड़ी संख्या में किसानों ने आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी लेने के साथ उनकी खरीदारी भी की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समापन समारोह में कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि यह मेला केवल प्रदर्शनी भर नहीं रहा&comma; बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने का प्रभावी मंच साबित हुआ है&period; उन्होंने कहा कि आज खेती में मशीनों और नई तकनीक के इस्तेमाल से काम आसान हो रहा है&comma; लागत घट रही है और उत्पादन बढ़ाने के अवसर भी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार खेती को मजबूत बनाने के लिए लगातार योजनाएं चला रही हैं&comma; जिससे किसानों को आधुनिक उपकरण&comma; सिंचाई सुविधा और तकनीकी सहयोग मिल सके&period; सरकार का प्रयास है कि खेती कम लागत और कम मेहनत में अधिक उत्पादन देने वाली बने&comma; ताकि किसानों की आय में भी वृद्धि हो&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को सम्मानित भी किया गया&period; बिरला टायर्स को प्रथम&comma; हेवेल्स इंडिया को द्वितीय और शक्तिमान को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया&period; कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि एग्रो बिहार मेला पूर्वी भारत के बड़े कृषि यांत्रिकरण मेलों में से एक बन चुका है&period; वर्ष 2011 से लगातार इसका आयोजन किया जा रहा है&period; मेले में कृषि यंत्र निर्माता कंपनियों&comma; वैज्ञानिकों&comma; कृषि स्टार्टअप और ड्रोन आधारित सेवाओं से जुड़े संस्थानों ने अपने उत्पाद और तकनीक का प्रदर्शन किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> मेले में मखाना प्रोसेसिंग मशीन&comma; इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर&comma; रोबोटिक्स&comma; कृत्रिम बुद्धिमत्ता&comma; इंटरनेट ऑफ थिंग्स&comma; फसल अवशेष प्रबंधन और पोस्ट हार्वेस्ट तकनीकों से जुड़े उपकरणों का भी प्रदर्शन किया गया&comma; जिससे किसानों को आधुनिक खेती के नए विकल्पों की जानकारी मिली। कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने बताया कि मेले के दौरान कृषि यंत्र निर्माताओं और विभागीय अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श भी हुआ&period; इसमें कृषि वैज्ञानिकों और विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए&comma; जिससे किसानों और प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी मिली। मेले में उद्यान&comma; बीज&comma; पौधा संरक्षण&comma; भूमि संरक्षण&comma; उर्वरक और कृषि प्रसंस्करण से जुड़े स्टॉल भी लगाए गए थे&comma; जहां किसानों ने नई तकनीकों और उपकरणों की जानकारी ली।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कृषि यंत्रों की बिक्री पर 1&period;85 करोड़ रुपये का अनुदान मेले के दौरान किसानों ने बड़ी संख्या में कृषि यंत्रों की खरीदारी की&period; चार दिनों में कुल 395 कृषि यंत्रों की खरीद पर सरकार की ओर से लगभग 1&period;85 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया&period; इन यंत्रों का कुल बाजार मूल्य करीब 4&period;78 करोड़ रुपये बताया गया। 35 हजार से अधिक किसानों और आगंतुकों ने किया भ्रमण। चार दिनों तक चले इस मेले में राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे&period; अंतिम दिन पटना&comma; दरभंगा&comma; समस्तीपुर&comma; मधुबनी&comma; मधेपुरा&comma; सुपौल और सहरसा के 1840 किसानों ने भाग लिया&period; पूरे मेले के दौरान 35 हजार से अधिक किसान और आम लोगों ने प्रदर्शनी का भ्रमण किया&period;<br &sol;>इस अवसर पर कृषि विभाग और सीआईआई के कई अधिकारी&comma; कृषि यंत्र निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।<&sol;p>&NewLine;

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