बिहार में पहली बार वैज्ञानिक तरीके से तैयार होगा फिश ब्रूड, सीतामढ़ी में 10.92 करोड़ से बना ब्रूड बैंक शुरू

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत<&sol;strong>। बिहार में मत्स्य पालन को नई दिशा देने की पहल शुरू हो गई है&period; सीतामढ़ी जिले के डुमरा अंचल के राघोपुर बखरी में राज्य के पहले फिश ब्रूड बैंक से वैज्ञानिक तरीके से फिश ब्रूड के उत्पादन और उन्नत मत्स्य बीज के वितरण की शुरुआत की गई&period; करीब 10&period;92 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 40 एकड़ में विकसित इस केंद्र का शुभारंभ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फिश ब्रूड बैंक के शुरू होने से बिहार के हैचरी संचालकों को स्थानीय स्तर पर कम कीमत में गुणवत्तापूर्ण&comma; स्वस्थ और आनुवंशिक रूप से उन्नत प्रजनक मछलियां उपलब्ध हो सकेंगी&period; इससे बेहतर गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज का उत्पादन बढ़ेगा और दूसरे राज्यों पर बिहार की निर्भरता कम होगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>वैज्ञानिक तरीके से तैयार होंगे गुणवत्तापूर्ण ब्रूडर<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अब तक राज्य के कई हैचरी संचालक प्रजनक मछलियों और मत्स्य बीज के लिए नदियों&comma; मन&comma; जलाशयों सहित प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर रहे हैं&period; प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाली प्रजनक मछलियों में आनुवंशिक दोष की संभावना रहती है&comma; जिसका असर मछलियों की वृद्धि&comma; उत्पादन और जीवित रहने की क्षमता पर पड़ सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सीतामढ़ी के फिश ब्रूड बैंक में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से स्वस्थ&comma; बड़े आकार और आनुवंशिक रूप से गुणवत्तापूर्ण ब्रूडर तैयार किए जाएंगे&period; इन ब्रूडर से गुणवत्तापूर्ण और रोग-मुक्त मत्स्य बीज तैयार किया जाएगा&period; इससे राज्य में मत्स्य बीज की गुणवत्ता में सुधार के साथ मछली उत्पादन की उत्पादकता भी बढ़ने की उम्मीद है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>40 एकड़ में विकसित हुआ आधुनिक केंद्र<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत विकसित इस केंद्र में ब्रूड स्टॉक तालाब&comma; नर्सरी पॉन्ड और रियरिंग पॉन्ड बनाए गए हैं&period; केंद्र में मत्स्य बीज हैचरी भी स्थापित की गई है&period; इसके माध्यम से मत्स्यपालकों को बेहतर गुणवत्ता वाला मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जाएगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>केंद्र को सीतामढ़ी में नीली क्रांति के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है&period; यहां भारतीय मेजर कार्प की प्रमुख प्रजातियों रोहू&comma; कतला और मृगल के अलावा जयंती रोहू&comma; कॉमन कार्प&comma; अमृत कतला और अमूर कार्प समेत अन्य उपयोगी प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाएगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>मत्स्यपालकों की आय बढ़ने की उम्मीद<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण और सस्ता मत्स्य बीज मिलने से बिहार में मछली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा&period; इससे मत्स्यपालकों की उत्पादन लागत में कमी आने के साथ उनकी आय बढ़ने की संभावना है&period; मत्स्य पालन से जुड़े अन्य क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे&comma; जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>भविष्य में बिहार से दूसरे राज्यों को मत्स्य बीज की आपूर्ति के साथ मत्स्य उत्पादों के व्यापार और निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है&period; केंद्र के माध्यम से मिट्टी और पानी की जांच&comma; प्रशिक्षण तथा तकनीकी मार्गदर्शन जैसी सुविधाओं को भी विकसित किया जाएगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सीतामढ़ी में 76&period;60 करोड़ की लागत से दुग्ध चूर्ण संयंत्र शुरू<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम के दौरान सीतामढ़ी के डेयरी क्षेत्र को भी बड़ी सौगात मिली&period; राज्य योजना 2025-26 और 2026-27 के तहत 30 एमटीपीडी क्षमता वाले दुग्ध चूर्ण संयंत्र का शुभारंभ किया गया&period; इस परियोजना की कुल लागत 76&period;60 करोड़ रुपये बताई गई है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विभागीय सचिव तथा कॉम्फेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजनाओं की जानकारी दी&period; बताया गया कि इन परियोजनाओं के संचालन से सीतामढ़ी और आसपास के क्षेत्रों में डेयरी&comma; पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े किसानों की आजीविका को नई दिशा मिलेगी&period; इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन&comma; पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह&comma; बिहार के डेयरी&comma; मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंद किशोर राम तथा उद्योग एवं खेल विभाग की मंत्री और सीतामढ़ी की प्रभारी मंत्री श्रेयसी सिंह मौजूद रहीं&period;चाहें तो इसे मैं और ज्यादा दमदार अखबारी हेडिंग&comma; 2-3 छोटे सबहेड और 500-600 शब्दों की फ्रंट-पेज शैली में भी तैयार कर सकता हूं।<&sol;p>&NewLine;

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