नेटवर्क मेंबर के सहयोग से किया जा रहा फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का क्रियान्वयन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">कटिहार&comma; न्यूज क्राइम 24।<&sol;mark><&sol;strong> फाइलेरिया उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। जिले के चिह्नित प्रखंडों में ग्रामीण स्तर पर फाइलेरिया से ग्रसित मरीजों की खोज करते हुए उनकी टीम बनाई गई है&comma; जिससे समय समय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनके फाइलेरिया प्रभावित अंगों की देखभाल हो सके और आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई जाए। शनिवार को जिले के बरारी प्रखंड के अतिरिक्त स्वास्थ्य उपकेंद्र&comma; सेमापुर में 15 स्थानीय फाइलेरिया ग्रसित मरीजों में कैम्प लगाकर एमएमडीपी किट्स का वितरण किया गया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इसके साथ ही मरीजों को घर में रहकर फाइलेरिया ग्रसित अंगों के नियमित देखभाल करने और सेल्फ एक्सरसाइज करने का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान बरारी प्रखंड के हेल्थ एजुकेटर पारसनाथ झा&comma; सीएचओ साहब सिंह&comma; भीबीडीएस सुबोध कुमार&comma; सीफार डीसी पल्लवी कुमारी&comma; बीसी अमित कुमार&comma; पिरामल फाउंडेशन के बीसी सीतल पंडित&comma; एएनएम रिंकू कुमारी&comma; एलिजाबेथ मरांडी&comma; सुनीता देवी उपस्थित थी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फाइलेरिया ग्रसित मरीजों के साथ स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाया गया है पेशेंट सपोर्ट ग्रुप &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>हेल्थ एजुकेटर पारसनाथ झा ने बताया कि फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को नियमित देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में पेशेंट सपोर्ट ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप में स्थानीय स्तर के सभी फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को शामिल किया गया है जिसकी हर महीने बैठक आयोजित की जाती है। उस दौरान मरीजों के फाइलेरिया ग्रसित अंगों की जानकारी लेते हुए उपचार के लिए उपलब्ध दवाइयों व सेल्फ केयर करने की जानकारी दी जाती है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फाइलेरिया ग्रसित मरीजों द्वारा नियमित रूप से सेल्फ केयर करने पर फाइलेरिया को नियंत्रित रखा जा सकता है जिससे मरीजों को एक्यूट अटैक होने की संभावना नहीं रहती। उन्होंने बताया कि पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के क्रियान्वयन के लिए फाइलेरिया ग्रसित मरीजों का नेटवर्क बनाया जा रहा है जिससे कि स्थानीय स्तर पर एक मरीज द्वारा दूसरे फाइलेरिया ग्रसित मरीजों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए जिससे सम्बंधित मरीजों को भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराई जा सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सेल्फ केयर के लिए बरारी में फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को मिला एमएमडीपी किट्स &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>अतिरिक्त स्वास्थ्य उपकेन्द्र&comma; सेमापुर में स्थानीय 15 फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को घर में फाइलेरिया ग्रसित अंगों की बेहतर देखभाल करने के लिए एमएमडीपी किट्स का वितरण किया गया। सीएचओ साहब सिंह ने बताया कि एमएमडीपी किट्स में मरीजों को एक टब&comma; एक मग&comma; डेटोल साबुन&comma; तौलिया व महलम दिया गया है। घर में मरीजों को नियमित रूप से ताजे पानी के साथ साबुन लगाकर फाइलेरिया ग्रसित अंगों की सफाई करनी है। इसके बाद तौलिए से ग्रसित अंगों को साफ करते हुए वहां महलम लगाना है। ऐसा करने से प्रभावित अंगों के नियंत्रण में सहयोग मिलेगा। इसके साथ ही मरीजों को घर में फाइलेरिया ग्रसित अंगों के एक्सरसाइज करने का भी प्रशिक्षण दिया गया। ऐसा करने से फाइलेरिया ग्रसित अंगों में सूजन में कमी हो सकती और मरीजों को इसका बेहतर लाभ मिल सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>एमडीए कार्यक्रम में भाग लेकर लोग फाइलेरिया से रहें सुरक्षित &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>जिला वेक्टर बोर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ&period; जे&period; पी&period; सिंह ने बताया कि फाइलेरिया बीमारी क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला रोग है। यह मच्छर किसी भी फाइलेरिया ग्रसित मरीज के शरीर का कीटाणु सामान्य लोगों में डाल सकता है जिससे कि सामान्य व्यक्ति फाइलेरिया ग्रसित हो सकता है। लोगों को फाइलेरिया बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा साल में एक बार सर्वजन दवा सेवन &lpar;एमडीए&rpar; कार्यक्रम चलाया जाता है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिसके तहत ग्रसित स्तर तक आशा कर्मियों द्वारा 02 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को डीईसी व अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाती है। नियमित रूप से पांच साल तक इसका सेवन करने पर लोग फाइलेरिया ग्रसित होने से सुरक्षित रह सकते हैं। इसलिए सभी लोगों को इसका सेवन करते हुए अपने और अपने परिवार के सभी सदस्यों को फाइलेरिया से सुरक्षित रखना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;

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