घर में मौजूद खाद्य पदार्थों से एनीमिया पर करें वार

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>कटिहार&lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;&colon; <&sol;strong>एनीमिया यानी खून की कमी एक ऐसी स्थिति है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम जाती है&period; ऑक्सीजन ले जाने के लिए हीमोग्लोबिन की आवश्यकता होती है&period; यदि शरीर में बहुत कम या असामान्य लाल रक्त कोशिकाएं हैं&comma; या पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं है&comma; तो शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन ले जाने के लिए रक्त की क्षमता कम हो जाती है&period; इसके परिणामस्वरूप थकान&comma; कमजोरी&comma; चक्कर आना और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देते हैं&period; एनीमिया के कारण बच्चों में उम्र के मुतबिक वजन एवं लंबाई भी कम जाती है एवं वे एवं दुबलापन एवं नाटापन के शिकार हो जाते हैं&period; जिससे बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाती है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पोषक तत्वों की कमी के साथ संक्रामक रोग ज़िम्मेदार &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एनीमिया के सबसे आम कारणों में पोषक तत्वों की कमी&comma; विशेष रूप से आयरन की कमी शामिल होती है&period; साथ ही विटामिन की कमी भी एनीमिया के लिए जिम्मेदार होते हैं&period; शरीर में विटामिन सी&comma; ए&comma; डी&comma; बी12 एवं ई की भूमिका अधिक होती है&period; विटामिन सी शरीर में आयरन के चयापचय को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है&period; विशेष रूप से यह आयरन के अवशोषण एवं इसकी गतिशीलता को भी बढ़ाता है&period; इसलिए विटामिन सी युक्त आहार जैसे आँवला&comma; नीबूं एवं अमरुद जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन जरुर करना चाहिए&period; ये खाद्य पदार्थ आसानी से घरों में उपलब्ध हो जाते हैं&period; एनीमिया के प्रमुख कारणों में पोषक तत्वों की कमी के साथ कई संक्रामक रोग भी शामिल होते हैं&period; जिसमें मलेरिया&comma; टीबी&comma; एचआईवी और अन्य परजीवी संक्रमण शामिल हैं&period; इन रोगों से ग्रसित होने के बाद अमूमन शरीर में खून की कमी हो जाती है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>2 साल से कम उम्र के बच्चों के आहार पर दें ध्यान &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एनीमिया किसी भी आयुवर्ग के लोगों को हो सकता है&period; लेकिन 2 साल से कम उम्र के बच्चों में खून की जरूरत अधिक होती है&period; 2 साल से कम उम्र के बच्चों की वृद्धि दर बहुत अधिक होती है&period; 6 से 24 महीने की उम्र के बीच&comma; शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम आयरन की आवश्यकता जीवन के अन्य चरणों की तुलना में अधिक होती है&period; जन्म के समय कम वजन और समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं को अधिक जोखिम होता है&period; 2 साल की उम्र के बाद विकास की दर धीमी हो जाती है एवं हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती है&period; इस लिहाज से इस दौरान शिशु के आहार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है&period; जन्म से 6 माह तक केवल स्तनपान जरुरी होता है&period; इस दौरान ऊपर से पानी भी शिशु को नहीं देना चाहिए&period; वहीं&comma; 6 माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार जरुरी होता है&period; जिसमें बच्चे को अर्ध ठोस आहार देना चाहिए&period; साथ ही यह ध्यान भी देना चाहिए कि उनके आहार में आनाज&comma; विटामिन एवं वसा की मात्रा शामिल हो&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>एनीमिया को दूर करने के लिए सरल खाद्य पदार्थ &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>• हरी साग-सब्जी<br &sol;>• चना एवं गुड़<br &sol;>• मौसमी फ़ल<br &sol;>• मीट&comma; मछली एवं चिकन<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>दवा से अधिक जागरूकता की जरूरत &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डीपीएम स्वास्थ्य डॉ&period; किशलय कुमार ने बताया एनीमिया से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग कई प्रयास कर रहा है&period; पाँच से 59 महीने के बालक और बालिकाओं को आईएफए की सिरप एवं 5 से 9 साल के लड़के और लड़कियाँ&comma; 10 से 19 साल के किशोर औरकिशोरियां&comma; 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की महिलाएँ&lpar; जो गर्भवती या धात्री न हो&rpar;&comma; गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आईएफए की गोली निशुल्क दी जा रही है&period; ताकि एनीमिया के दंश से उन्हें बचाया जा सके&period; साथ ही यह जरुरी भी है कि सभी आयुवर्ग के लोग अपने खाद्य पदार्थों पर ध्यान भी दें एवं पौष्टिक आहार का सेवन करें&period; दवा से अधिक एनीमिया को लेकर जागरूकता की जरूरत है&period;<&sol;p>&NewLine;

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