सिंचाई विभाग के खिलाफ किसानों का विरोध, 100 एकड़ से ज्यादा खेत में लगी फसल बर्बाद

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर<&sol;strong> &colon; जिले के फारबिसगंज प्रखंड के तिरस्कन्द पंचायत महिषा कोल नहर क्षेत्र में सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण 100 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि प्रभावित हो गया है। नहर में बने गद्दे की वजह से पानी खेतों में घुस गया&comma; जिससे किसानों की धान&comma; मक्का&comma; भिंडी और मटर की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गया हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने तीन महीने पहले सिंचाई विभाग को इस समस्या के बारे में सूचित किया था&comma; लेकिन विभाग ने बिना किसी जांच के नहर से पानी छोड़ दिया&comma; जिसके कारण उनके खेतों में पानी भर गया और फसल नष्ट हो गईं। ग्रामीणों ने अब सिंचाई विभाग और आपदा विभाग से मुआवजे की मांग की है। प्रभावित किसानों में मन्नू पासवान&comma; इनर देव मंडल&comma; मोहम्मद बेचन&comma; मनोज ततमा&comma; लखीचंद मंडल&comma; शोभानंद मंडल&comma; मेंडल मंडल&comma; तबरेज आलम&comma; विनोद मंडल&comma; अनिल मंडल&comma; अरुण पासवान&comma; सुनील ठाकुर&comma; राज कुमार मंडल जैसे लोग शामिल हैं। इन किसानों ने प्रशासन से तत्काल मुआवजा देने की अपील की है और इस लापरवाही के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>क्या कहते हैं पूर्व जिला पार्षद दिलीप पटेल-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>इस बाबत श्री पटेल ने बताया कि बांध की समस्या को लेकर मैं भी कई बार विभागीय अधिकारी को समस्या से अवगत कराकर जांच करने का जानकारी दिया। इसके बावजूद भी नहर में पानी छोड़ देना विभाग की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। सरकार और वरीय अधिकारी से कहना चाहते हैं कि किसान की हुई छति की आकलन कर मुआवजा दिया जाए।<&sol;p>&NewLine;

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