पारंपरिक जड़ी-बूटियों से पशुओं का इलाज सीख रहे किसान, कछुआरा में इथेनो-वेटेनरी प्रशिक्षण

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत। <&sol;strong>पटना के कछुआरा गांव में बुधवार को पारंपरिक पशु चिकित्सा पद्धति &lpar;इथेनो-वेटेनरी मेडिसीन&rpar; पर आधारित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया&comma; जिसमें स्थानीय युवाओं और पशुपालकों को घरेलू जड़ी-बूटियों से पशुओं का इलाज करने की जानकारी दी गई। यह प्रशिक्षण बाएफ एवं कोटक महिंद्रा बैंक के सहयोग से आयोजित किया गया&comma; जिसमें लगभग 60 युवाओं और पशुपालकों ने भाग लिया&period; कार्यक्रम के दौरान एलोवेरा&comma; हल्दी&comma; चूना&comma; करी पत्ता&comma; नींबू&comma; नीम पत्ता&comma; नारियल&comma; गुड़&comma; मेथी और जीरा जैसी आसानी से उपलब्ध सामग्रियों से दवा बनाने की विधि सिखाई गई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विशेषज्ञों ने बताया कि इन पारंपरिक उपायों के जरिए पशुओं में होने वाली बीमारियां जैसे थनैला&comma; रिपीट ब्रीडर&comma; एफएमडी और बुखार का प्रभावी इलाज संभव है&period; प्रशिक्षण के दौरान प्रायोगिक रूप से दवा बनाकर पशुपालकों को दिखाया गया&comma; जिससे उन्हें इसे अपनाने में आसानी हो सके। कार्यक्रम में बाएफ सेंट्रल रिसर्च स्टेशन&comma; उरुली कंचन &lpar;पुणे&rpar; के श्री दीपक पाटिल एवं केएमबीएल प्रोजेक्ट ऑफिसर दीपक कुमार वर्मा ने विस्तार से जानकारी दी&period; उन्होंने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति कम खर्चीली होने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लिए काफी उपयोगी है। इस प्रशिक्षण से पशुपालकों में काफी उत्साह देखा गया और उन्होंने इसे अपने दैनिक पशुपालन कार्य में अपनाने की बात कही।<&sol;p>&NewLine;

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