पित्ताशय कैंसर पर मंथन के लिए जुटे देश-विदेश के विशेषज्ञ

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित। <&sol;strong>महावीर कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र में बृहस्पतिवार को पित्ताशय कैंसर विषय पर आयोजित विशेष सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम-2026 का भव्य आयोजन किया गया&period; इस अवसर पर देश और विदेश के ख्यातिप्राप्त कैंसर विशेषज्ञों&comma; सर्जनों&comma; शोधकर्ताओं तथा चिकित्सा शिक्षकों ने भाग लेकर पित्ताशय कैंसर के उपचार&comma; अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ&period; उद्घाटन सत्र में उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि पित्ताशय कैंसर उत्तर भारत&comma; विशेषकर बिहार और आसपास के राज्यों में गंभीर स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर रहा है। ऐसे में समय पर पहचान&comma; वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी चिकित्सकों तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में जापान&comma; रांची&comma; पटना समेत देश-विदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने भाग लिया&period; अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान&comma; इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान&comma; मेदांता सहित विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के चिकित्सकों ने वैज्ञानिक सत्रों में सक्रिय भागीदारी निभाई। वैज्ञानिक परिचर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने पित्ताशय कैंसर की शुरुआती पहचान&comma; शल्य चिकित्सा&comma; कीमोथेरेपी&comma; रेडियोथेरेपी तथा उपचार की नवीनतम तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की&period;चिकित्सकों ने जटिल मामलों के अध्ययन और उपचार से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए&comma; जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विशेषज्ञों ने कहा कि कैंसर के उपचार में तेजी से हो रहे बदलावों को देखते हुए चिकित्सकों का नियमित प्रशिक्षण और ज्ञानवर्धन आवश्यक है&period; इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम न केवल चिकित्सा समुदाय को नई दिशा देते हैं&comma; बल्कि मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों को कैंसर उपचार के क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध और तकनीकी विकास से अवगत कराना है&period; इससे रोगियों के इलाज की गुणवत्ता में और सुधार संभव हो सकेगा। कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सकों&comma; शोधकर्ताओं&comma; चिकित्सा छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों की बड़ी भागीदारी रही&period; विशेषज्ञों के विचार-विमर्श&comma; प्रश्नोत्तर सत्र और धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।<&sol;p>&NewLine;

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