आठ दिवसीय ग्रीष्मकालीन चाक्षुष कला कार्यशाला-2026 का शुभारंभ

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> कला एवं संस्कृति विभाग&comma; बिहार सरकार के अंतर्गत बिहार ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित आठ दिवसीय ग्रीष्मकालीन चाक्षुष कला कार्यशाला-2026 का आज विधिवत शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का उद्घाटन माननीय मंत्री&comma; कला एवं संस्कृति विभाग&comma; बिहार सरकार डॉ&period; प्रमोद कुमार द्वारा किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक श्रीमती रूबी &lpar;भा&period;प्र&period;से&period;&rpar;&comma; संग्रहालय निदेशालय के निदेशक श्री कृष्ण कुमार &lpar;भा&period;प्र&period;से&period;&rpar;&comma; बिहार ललित कला अकादमी की सचिव श्रीमती अमृता प्रीतम&comma; कलाकार&comma; प्रशिक्षक&comma; अभिभावक एवं बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अपने संबोधन में माननीय मंत्री डॉ&period; प्रमोद कुमार ने कहा कि कला एवं संस्कृति विभाग बच्चों और युवाओं की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में अनेक प्रतिभाएं मौजूद हैं&comma; जिन्हें उचित मंच और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। इस दिशा में विभाग निरंतर कार्य कर रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस मौके पर माननीय मंत्री ने सुझाव दिया कि भविष्य में कम से कम एक माह की अवधि की आवासीय कला कार्यशाला आयोजित की जाए&comma; जिसमें बिहार के विभिन्न जिलों के बच्चे भी भाग ले सकें। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिभागियों के लिए आवास&comma; भोजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं विभाग की ओर से उपलब्ध कराने संबंधित प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा&comma; ताकि दूर-दराज क्षेत्रों की प्रतिभाओं को भी अपनी कला को निखारने का अवसर प्राप्त हो सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वहीं&comma; सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक श्रीमती रूबी ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं बच्चों की कल्पनाशीलता&comma; सृजनशीलता एवं रचनात्मक सोच को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कला के माध्यम से बच्चे अपनी अभिव्यक्ति को नया आयाम देते हैं तथा उनमें नवाचार और आत्मविश्वास का विकास होता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>03 जून से 10 जून तक आयोजित होने वाली इस कार्यशाला में 08 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों एवं किशोरों को पेपर मेशी&comma; वेस्ट मेटेरियल क्राफ्ट तथा टेराकोटा जैसी कला विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को अनुपयोगी वस्तुओं के रचनात्मक उपयोग&comma; पर्यावरण संरक्षण तथा &OpenCurlyQuote;वेस्ट टू बेस्ट’ की अवधारणा से भी अवगत कराया जाएगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यशाला प्रतिदिन पूर्वाह्न 11&colon;00 बजे से अपराह्न 3&colon;00 बजे तक बिहार ललित कला अकादमी के बहुद्देशीय सांस्कृतिक परिसर में संचालित की जाएगी। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिभागियों को आवश्यक कला सामग्री एवं अल्पाहार निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम के अंत में बिहार ललित कला अकादमी की सचिव श्रीमती अमृता प्रीतम ने सभी अतिथियों&comma; कलाकारों&comma; प्रशिक्षकों&comma; अभिभावकों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। वहीं मंच का संचालन श्रीमती सोमा चक्रवर्ती द्वारा किया गया।<&sol;p>&NewLine;

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