संवर्द्धन कार्यक्रम के जरिये जिले को कुपोषण मुक्त बनाने का हो रहा प्रयास

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon; <&sol;strong>कोरोना महामारी की वजह से स्वास्थ्य व पोषण संबंधी विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हुआ है। लोगों की आर्थिक स्थिति पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है। ऐसे में गरीब परिवारों के छोटे-छोटे बच्चों के पूर्ण पोषाहार उपलब्ध कराने की चुनौतियां कई गुणा बढ़ गयी है। ऐसे में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के बेहतर देखभाल की जरूरतें बढ़ी हैं। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिये नीति आयोग द्वारा चयनित राज्य के पांच आकांक्षी जिलों में संवर्द्धन कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। इसमें अररिया भी शामिल है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सामूहिक प्रयास से होगा कार्यक्रम सफल &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>संवर्द्धन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अतिकुपोषित बच्चों की पहचान कर समुदाय स्तर पर बेहतर देखभाल की मदद से उसे कुपोषण की समस्या से पूर्णत&colon; निजात दिलाना है। आईसीडीएस व स्वास्थ्य विभाग के परस्पर सहयोग से संचालित संवर्द्धन कार्यक्रम की सफलता में पिरामल स्वास्थ्य&comma; यूनिसेफ&comma; डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय&comma; पूसा सहित अन्य सहयोगी संस्था से जरूरी मदद ली जा रही है। कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा की जानकारी देते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार को फारबिसगंज एएनएम कॉलेज सभागार में में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें फारबिसगंज व नरपतगंज प्रखंड की आंगनबाड़ी सेविका व आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>समुदाय स्तरीय देखभाल कम होंगे कुपोषण के मामले &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इसमें मुख्य प्रशिक्षक के रूप में भाग लेते हुए पल्लवी कुमारी ने बताया कि अति कुपोषित बच्चों को सामुदायिक स्तर विशेष देखभाल की मदद से पूर्णत&colon; ठीक किया जा सकता है। समुदाय स्तर पर विशेष देखभाल संबंधी जानकारी उन्होंने प्रशिक्षुओं को दी। संवर्द्धन कार्यक्रम के संबंध में कर्मियों को जरूरी प्रशिक्षण देते हुए राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा के केशव कुणाल&comma; पोषण अभियान के जिला समन्वयक कुणाल कुमार श्रीवास्तव&comma; पिरामल स्वास्थ्य के डीपीएल संजय कुमार झा व यूनिसेफ के एसएमसी आदित्य कुमार सिंह ने कहा कि पूर्व में अति कुपोषित बच्चों को बेहतर देखभाल के लिये पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता था। लगातार हो रहे अध्ययन व शोध से पता चला कि अति कुपोषित 10 से 15 फीसदी बच्चों को ही एनआरसी भेजे जाने की जरूरत है। शेष 90 प्रतिशत बच्चे समुदाय स्तरीय देखभाल से कुपोषण से मुक्त हो सकते हैं। इस लिहाज से संवर्द्धन कार्यक्रम के सफल संचालन को महत्वपूर्ण बताया गया।<&sol;p>&NewLine;

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