महावीर मंदिर में दुर्गापूजा : भक्तों ने अपने नाम और गोत्र से कराई कलश स्थापना

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> दुर्गापूजा के मौके पर पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई। श्रद्धालु मंदिर परिसर में अपने नाम और गोत्र से कलश स्थापित करवाकर माँ दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना और पाठ करवाया। मंदिर में कलश स्थापना कर माँ भगवती की आराधना करने का यह पवित्र विधान बीते कई वर्षों से लगातार चला आ रहा है। श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल भी भक्तों के साथ कलश स्थापना किया।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने बताया कि बीते वर्षों की तरह इस वर्ष भी नवरात्र के मौके पर कलश स्थापना की व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालु नवरात्र में अपने नाम से अनुष्ठान कराना चाहते थे&comma; वे मंदिर के बुकिंग काउंटर या मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग कराई थी। करीब 40 भक्तों ने कलश स्थापना और दुर्गा सप्तशती पाठ के लिए बुकिंग कराई थी। भक्तों के सहूलियत के लिए &period;ह व्यवस्था हर साल की जाती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>दुर्गासप्तशती पाठ &lpar;सम्पुट&rpar;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विवरण&colon; श्रीदुर्गासप्तशती में सात सौ मन्त्र हैं। विभिन्न कामनाओं की सिद्धि के लिए 13 अध्यायों के इन सात सौ मन्त्रों में से प्रत्येक के आगे-पीछे विशेष बीजमन्त्र जोड़कर सम्पुट पाठ किया जाता है। एक सामान्य पाठ की तुलना में इस सम्पुट पाठ में तीन गुना अधिक समय लगता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>दुर्गासप्तशती पाठ &lpar;साधारण&rpar;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विवरण&colon; देवी की उपासना में यह पाठ सर्वाधिक प्रसिद्ध है। इसके अंतर्गत अर्गला&comma; कीलक&comma; कवच&comma; शापोद्धार&comma; शतनाम&comma; मूल 13 अध्याय एवं अंत में ऋग्वेद के देवी-सूक्त का पाठ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया जाता है। इस अनुष्ठान को पूर्ण होने में लगभग ढाई घंटे का समय लगता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>कलश स्थापन&sol;दुर्गा पाठ सहित &lpar;नौ दिन&rpar; –<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>विवरण&colon; कलश स्थापना&comma; जिसे घटस्थापना भी कहा जाता है&comma; नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनिवार्य अंग है। यह नौ दिनों की अवधि तक चलने वाला विशेष अनुष्ठान है&comma; जिसमें देवी के नौ स्वरूपों की निरंतर पूजा की जाती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।<&sol;p>&NewLine;

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