रोशनी और पवित्रता का त्यौहार दीपावली कल, यहां जाने शुभ मुहूर्त

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>&lpar;पूजा करने का शुभ मुहूर्त 2 घंटे 11 मिनट रहेगा&rpar;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>डेस्क&lpar;रॉबिन राज&comma; न्यूज़ क्राइम 24&rpar;&colon; <&sol;strong>कोरोना संक्रमण के निराशा भरे दौर के बाद à¤œà¥€à¤µà¤¨ में उत्सव और उल्लास भरने वाला दीपोत्सव यानी दीपावली का त्योहार आ ही गया&period; कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है&period; इस बार दीपावली पर्व पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त 2 घंटे 11 मिनट रहेगा। पिछले साल केवल 1 घंटे 37 मिनट का समय मिला था। लेकिन इस बार अच्छा समय मिलने के बाद लोग पूजा अर्चना भी अच्छे से कर सकेंगे&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रोशनी का त्योहार दीपावली भारत के सबसे बड़े&nbsp&semi;त्योहारों में से एक है&period; यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है&period; भारतवर्ष में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है&period; इसे दीपोत्सव भी कहते हैं&period; दिवाली दरअसल एक दिन का नहीं&comma; बल्कि 5 दिनों का त्योहार है&period; धनतेरस से ही इस त्योहार की शुरुआत हो जाती है&period; धनतेरस&comma; नरक चतुदर्शी&comma; अमास्या&comma; शुक्ल प्रतिपदा और भाई दूज तक दिवाली का त्योहार मनाया जाता है&period; यह त्योहार देश में ही नहीं&nbsp&semi;बल्कि विदेशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>दीवाली से जुड़ी पांच मान्यता इस प्रकार-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार दिवाली के दिन ही श्री राम जी वनवास से अयोध्या लौटे थे। मान्यता है अयोध्या वापस लौटने की खुशी में दीपावली मनाई गई थी। मंथरा की गलत विचारों से भ्रमित होकर भरत की माता कैकई ने श्री राम को उनके पिता दशरथ से वनवास भेजने के लिए वचनबद्ध कर देती है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम अपने पिता के आदेश को मानते हुए अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के लिए वनवास पर निकल गए।&nbsp&semi;अपनी 14 वर्ष की वनवास पूरा करने के बाद श्री राम जी दिवाली के दिन अयोध्या वापस लौटे थे। राम जी के वापस आने की खुशी में पूरे राज्य के लोग रात में दीप जलाए थे और खुशियां मनाए थे। उसी समय से दिवाली मनाई जाती है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>हिन्दू महाग्रंथ महाभारत के अनुसार कौरवों ने शतरंज के खेल में शकुनी मामा के चाल की मदद से पांडवों का सब कुछ जीत लिया था। इसके साथ ही पांडवों को राज्य छोड़कर 13 वर्ष के वनवास पर भई जाना पड़ा। इसी कार्तिक अमवस्या को पांडव 13 वर्ष के वनवास से वापस लौटे थे। पांडवों के वापस लौटने की खुशी में राज्य के लोगों ने दिये जलाकर खुशियां मनाई थी&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>नरकासुर प्रागज्योतिषपुर नगर &lpar;जो इस समय नेपाल में है&rpar; का राजा था। उसने अपनी शक्ति से इंद्र&comma; वरुण&comma; अग्नि&comma; वायु आदि सभी देवताओं को परेशान कर दिया था। नरकासुर ने संतों आदि की 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना लिया था। जब नरकासुर का अत्याचार बढ़ गया तो देवता व ऋषिमुनि भगवान श्रीकृष्ण की शरण में गए और उससे मुक्ति की गुहार लुगाई। भगवान ने उन्हें मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया। भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। इसी खुशी में लोगों ने दूसरे दिन अर्थात कार्तिक मास की अमावस्या को अपने घरों में दिपक जलाए। तभी से नरक चतुर्दशी तथा दीपावली का त्योहार मनाया जाता है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समुंद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास की अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी जी ने अवतार लिया था। लक्ष्मी जी को धन और समृद्धी की देवी माना जाता है। इसलिए इस दिन लक्ष्मी जी की विशेष पूजा होती है। दीपावली मनाने का ये भी एक मुख्य कारण है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्राचीन भआरत में राजा विक्रमादित्य एक महान सम्राट थे। मुगलों को धूल चटाने वाले विक्रमादित्य अंतिम हिंदू राजा थे। विक्रमादित्य एक बहुत ही आदर्श और उदार राजा थे। उनके साहस और विद्वानों के संरक्षण के कारण उन्हें हमेशा याद किया जाता है। इसी कार्तिक मास की अमावस्या को उनका राज्यभिषेक हुआ था&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>2 घंटे 11 मिनट रहेगा शुभ मुहूर्त-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दीपावाली पर लक्ष्मी पूजन के तीन मुहूर्त होते हैं। इन्हें प्रदोष काल&comma; निशीथ काल और महानिशीथ काल कहा जाता है। अमावस्या तिथि 4 नवंबर 2021 सुबह 6 बजकर 3 मिनट से समापन 5 नवंबर को सुबह 2 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। लक्ष्मी पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 9 मिनट से रात्रि 08 बजकर 20 मिनट तक है। प्रदोष काल 5 बजकर 34 मिनट से 7 बजकर 10 मिनट तक व वृषभ काल 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 6 मिनट तक शुभ मुहूर्त है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पर्यावरण का भी रखे ख्याल&comma; पटाखों से बनाएं दूरी-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस बार कोरोना के कारण प्रदूषण फैलने से लोगों के जीवन पर विपरीत असर पड़ सकता है&period; ऐसे में पटाखों से दूरी बनाए रखें&period; पटाखों के बजाय दीप प्रज्जवलित करें&comma; अगर आपको पटाखे जलाने का बहुत मन है तो आप मार्केट में मिलने वाले ग्रीन पटाखों का उपयोग करें&period; इन पटाखों से ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी कम होता है&period; यह वातावरण को बेहद कम नुकसान पहुंचाते है।<&sol;p>&NewLine;

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