कोढ़ा एवं बरारी स्वास्थ्य केंद्र में फाइलेरिया मरीजों के बीच एमएमडीपी किट का वितरण

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">कटिहार&lpar;न्यूज क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> जिले के कोढ़ा एवं बरारी प्रखंड में फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को फाइलेरिया ग्रसित अंगों की विशेष देखभाल करने के लिए मोरबिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रीवेंशन &lpar;एमएमडीपी&rpar; किट का वितरण किया गया। एमएमडीपी किट्स के वितरण के साथ स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा मरीजों को फाइलेरिया ग्रसित अंगों की देखभाल करने और आवश्यक दवाइयों का नियमित उपयोग करने की जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही अधिकारियों द्वारा मरीजों को अपने घर व आसपास के लोगों को भी फाइलेरिया बीमारी से सुरक्षित रहने के लिए ध्यान रखने योग्य बातों की आवश्यक जानकारी दी गई। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सीएचसी कोढ़ा में 15 नेटवर्क मेंबर्स को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अमित आर्या&comma; भीबीडीएस अमरनाथ सिंह&comma; सीफार डीसी पल्लवी कुमारी व बीसी कुमार अंशुमन द्वारा और सीएचसी बरारी में 06 नेटवर्क मेंबर्स को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मुसर्रफ आलम&comma; बीएचएम मो&period; एकलाख&comma; भीबीडीएस सुबोध कुमार&comma; बीसीएम मरघुब आलम की उपस्थिति में एमएमडीपी किट प्रदान की गयी। इसके साथ ही स्वास्थ्य केन्द्र में सभी मरीजों को एमएमडीपी उपयोग के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फाइलेरिया मरीजों को स्वास्थ्य विभाग से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं नेटवर्क मेंबर &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ&period; जे&period; पी&period; सिंह ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को सफल बनाने के लिए लोगों को जागरूक होना जरूरी है। इसमें आमलोगों को फाइलेरिया होने के कारणों की जानकारी होने के साथ फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा मिल रही सुविधाओं का लाभ उठाने की जरूरत है। इस कार्य में नेटवर्क मेंबर द्वारा स्वास्थ्य विभाग को विशेष सहयोग प्रदान किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को ही नेटवर्क मेंबर बनाया गया है। प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में नेटवर्क मेंबर की अलग अलग टीम बनाई गई है। सभी टीम द्वारा हर माह बैठक का आयोजन किया जाता है जहां एक दूसरे के स्वास्थ्य की जानकारी ली जाती । <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इसके साथ ही नए फाइलेरिया मरीजों को नेटवर्क मेंबर द्वारा अस्पताल से जोड़ा जाता है&comma; जहां उनकी फाइलेरिया स्थिति की जांच कराई जाती। उन्हें भी एमएमडीपी किट उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने बताया कि सोमवार को कोढ़ा प्रखंड में नेटवर्क मेंबर ललिता देवी द्वारा 4 फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को गांव से लेकर सीएचसी कोढ़ा लाया गया। जहां उनकी प्रखंड फाइलेरिया इंचार्ज से जांच करवाते हुए  एमएमडीपी किट्स उपलब्ध कराई गई। वहीं बरारी प्रखंड में भी नेटवर्क मेंबर द्वारा फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को विशेष देखभाल के लिए एमएमडीपी किट लेने के लिए अस्पताल लाया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फाइलेरिया मरीजों को सावधानी रखते हुए ग्रसित अंगों की देखभाल की दी गई जानकारी &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एमएमडीपी किट वितरण के साथ ही सभी फाइलेरिया मरीजों को ग्रसित अंगों की नियमित रूप से देखभाल की जानकारी दी गई। कोढ़ा भीबीडीएस अमरनाथ सिंह ने बताया कि फाइलेरिया ग्रसित होने पर उसका सम्पूर्ण इलाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में ग्रसित अंगों की सही तरीके से देखभाल जरूरी है। ज्यादातर लोगों के पांव फाइलेरिया से ग्रसित होते हैं जिसे आमतौर पर हाथीपांव भी कहा जाता। इससे ग्रसित होने पर लोगों को इसका विशेष ध्यान रखना जरूरी है। पांव को नियमित रूप से डेटॉल साबुन से साफ करने के साथ उसमें एंटीसेप्टिक क्रीम लगानी चाहिए। इससे ग्रसित अंगों का आवश्यक नियंत्रण किया जा सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फाइलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता आवश्यक &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>कोढ़ा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अमित आर्या ने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों द्वारा फैलता है। विशेष रूप से परजीवी क्यूलैक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के काटने से। जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया से ग्रस्त व्यक्ति को काटता तो वह संक्रमित हो जाता है। फिर जब यह मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के विषाणु रक्त के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी फाइलेरिया से ग्रसित कर देता । संक्रमित मच्छर के काटने से बहुत छोटे आकार के कृमि शरीर में प्रवेश करते हैं। ये कृमि लसिका तंत्र की नलियों में होते हैं और उन्हें बंद कर देते ।  फाइलेरिया को खत्म करने के लिए कोई विशेष इलाज नहीं हैं लेकिन जागरूक रहकर बचाव करने से इससे उबरा जा सकता है। अगर समय रहते फाइलेरिया की पहचान कर ली जाए तो जल्द ही इसका इलाज शुरू कर इसे खत्म किया जा सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों की देखभाल पर दिया जा रहा है ध्यान &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बरारी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ&period; मुसर्रफ आलम ने कहा कि फाइलेरिया के मरीजों की देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर एमएमडीपी किट प्रदान किए जाते हैं। किट के रूप में एक टब&comma; एक मग&comma; कॉटन बंडल&comma; तौलिया&comma; डेटॉल साबुन&comma; एंटीसेप्टिक क्रीम&nbsp&semi; है। जिससे सम्बंधित मरीज फाइलेरिया ग्रसित अंगों का ध्यान रख सकें। इसके अलावा फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को नेटवर्क मेंबर बनाया गया है। जिससे कि उनके द्वारा संबंधित क्षेत्र में अन्य लोगों को फाइलेरिया के प्रति जागरूक किया जा सके और फाइलेरिया ग्रसित मरीज सही समय पर अस्पताल पहुँचकर अपनी जांच करवाते हुए अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठा सकें।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सरकार द्वारा सर्वजन दवा सेवन अभियान द्वारा लोगों को खिलायी जाती है फाइलेरिया रोधी दवा &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कटिहार के भीडीसीओ एन के मिश्रा ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव के लिए सरकार द्वारा साल में एक बार सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम चलाया जाता है। इस दौरान घर घर जाकर लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षित रहने के लिए फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई जाती है। सभी लोगों द्वारा लगातार पांच साल तक अगर साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया जाता तो वे इन बीमारी से सुरक्षित रह सकते हैं।<&sol;p>&NewLine;

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