प्रभाष प्रसंग 2026 में गांधीवादी चिंतन और हिंदी पत्रकारिता पर मंथन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>नई दिल्ली&comma; à¤†à¤¶à¥€à¤· रंजन &colon;<&sol;strong> गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति&comma; राजघाट में रविवार को &&num;8216&semi;प्रभाष प्रसंग 2026&&num;8217&semi; का स्मारक व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कौमी संवादिता&comma; गांधीवादी चिंतन&comma; हिंदी पत्रकारिता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर गहन विमर्श हुआ।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल&comma; प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गुजरात विद्यापीठ के पूर्व कुलपति डॉ&period; सुदर्शन अयंगर&comma; वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय और बनवारी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>भजनों से हुआ शुभारंभ<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की शुरुआत प्रख्यात शास्त्रीय गायिका सुश्री कलापिनी कोमकली की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने कबीर के भजन सुनता है गुरु ज्ञानी&&num;8217&semi; अवधूत गगन घटा घहरानी&&num;8217&semi; और &&num;8216&semi;बीत गए दिन भजन बिना रे&&num;8217&semi;&lowbar; गाकर पूरे सभागार को भक्तिमय कर दिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>&&num;8216&semi;कौमी संवादिता की मधुशाला&&num;8217&semi; पर व्याख्यान<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>&&num;8216&semi;कौमी संवादिता की मधुशाला&&num;8217&semi; विषय पर बोलते हुए डॉ&period; सुदर्शन अयंगर ने कहा कि <em>&&num;8216&semi;समाज में स्थायी शांति और सौहार्द केवल संवाद&comma; विश्वास और साहस से ही स्थापित हो सकते हैं।&&num;8217&semi;<&sol;em><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>गरुड़ पुराण और ईशावास्य उपनिषद का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने &&num;8216&semi;कौम&&num;8217&semi; को जोड़ने का माध्यम बनाया। <em>&&num;8216&semi;हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच मौजूद पूर्वाग्रहों की गांठ को संवाद से ही खोला जा सकता है।&&num;8217&semi;<&sol;em> गांधी की शांति सेना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता सभी को साथ लेकर चलने से संभव है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने कहा कि यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने का है&comma; लेकिन दुर्भाग्य से हिंदी मीडिया ने इस ऐतिहासिक अवसर को उचित महत्व नहीं दिया। उन्होंने प्रभाष जोशी को याद करते हुए कहा यदि वे आज होते तो हिंदी पत्रकारिता के युगधर्म पर देशव्यापी विमर्श खड़ा करते।&&num;8217&semi;&lowbar; उन्होंने प्रभाष जी का आग्रह भी याद किया &&num;8211&semi; <em>&&num;8216&semi;जनसत्ता मिल-बांटकर पढ़िए।&&num;8217&semi;<&sol;em><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>मुख्य अतिथि का संबोधन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि प्रेम समाज को जोड़ने वाली सबसे बड़ी शक्ति है। परस्पर प्रेम से ही मोहब्बत की पाठशाला चलती है।&&num;8217&semi;&lowbar; उन्होंने संत मीरा को प्रेम की सर्वोच्च साधिका बताया और कबीर के मगहर में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अध्यक्षीय वक्तव्य<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार बनवारी ने की। उन्होंने कहा कि गांधी का भारतीय समाज पर अटूट विश्वास था। विविधताओं के बीच सह-अस्तित्व की क्षमता ही भारतीय समाज की शक्ति है।&&num;8217&semi;&lowbar;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की प्रस्तावना जनसत्ता के पूर्व पत्रकार मनोज मिश्रा ने रखी। उन्होंने बताया कि यह 17वां प्रभाष प्रसंग है। इस अवसर पर हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर प्रभाष जोशी के लेखों के संकलन &&num;8216&semi;पत्रकारिता का युगधर्म&&num;8217&semi; और स्मारक व्याख्यान पुस्तिका का लोकार्पण भी किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अंत में डॉ&period; अशोक कुमार गाड़िया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में प्रभाष जोशी के पत्रकारिता जीवन पर आधारित वृत्तचित्र भी दिखाया गया&comma; जिसका संपादन हेमंत शर्मा ने किया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर डॉ&period; सचिदानंद जोशी&comma; सांसद राधेमोहन सिंह&comma; प्रताप सोमवंशी&comma; राकेश सिंह&comma; संदीप जोशी&comma; सोपान जोशी&comma; श्रुति अवस्थी सहित दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्रकारिता के विद्यार्थी भी मौजूद थे।<&sol;p>&NewLine;

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