आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मिला रियल टाइम टेस्ट, करमचट बाँध में एम्स पटना की बहु एजेंसी मेगा मॉक ड्रिल

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> आपदा या सामूहिक दुर्घटना के समय कम से कम समय में अधिक से अधिक लोगों तक राहत और चिकित्सा सहायता पहुँचाने की तैयारियों को परखने के लिए एम्स पटना ने शनिवार को रोहतास जिले के करमचट बाँध में मेगा फुल स्केल लाइव मॉक ड्रिल आयोजित की। एम्स पटना से करीब 200 किलोमीटर दूर आयोजित इस अभ्यास में एनडीआरएफ&comma; हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर&comma; जिला प्रशासन&comma; पुलिस&comma; अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं&comma; स्वयंसेवकों तथा एम्स पटना की मेडिकल और सपोर्ट टीमों ने संयुक्त रूप से भाग लिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मॉक ड्रिल में करमचट बाँध पर 150 से अधिक लोगों की मौजूदगी के दौरान एक काल्पनिक विस्फोट के बाद भगदड़ की स्थिति का सिमुलेशन किया गया। इसमें बच्चों&comma; युवाओं और बुजुर्गों सहित करीब 70 सिमुलेटेड कैजुअल्टी दिखाई गईं। इनमें 25 गंभीर यानी रेड जोन और 45 ग्रीन जोन कैजुअल्टी शामिल थीं। अभ्यास के दौरान दो लोगों के बाँध के पानी में गिरने की स्थिति का भी सिमुलेशन किया गया ताकि जल बचाव और चिकित्सा टीमों के बीच समन्वय को परखा जा सके। अभ्यास का नेतृत्व प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; अनिल कुमार&comma; प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष&comma; ट्रॉमा सर्जरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग&comma; एम्स पटना ने इंसिडेंट कमांडर के रूप में किया। मॉक ड्रिल में इंसिडेंट कमांड सिस्टम&comma; मरीजों की पहचान और ट्रायेज&comma; मरीजों की आवाजाही&comma; पुनर्जीवन&comma; आपातकालीन उपचार&comma; संसाधनों की उपलब्धता&comma; सुरक्षा&comma; संचार तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियों में परखा गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मॉक ड्रिल का एक प्रमुख आकर्षण भीष्म क्यूब की त्वरित तैनाती रहा। इसके माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि किसी दूरस्थ या संसाधन सीमित क्षेत्र में भी आवश्यक चिकित्सा उपकरण&comma; डायग्नोस्टिक सुविधाएं और जीवनरक्षक उपचार कितनी तेजी से उपलब्ध कराए जा सकते हैं। चेस्ट ट्यूब इंसर्शन&comma; पेल्विक स्टेबलाइजेशन&comma; स्प्लिंटिंग&comma; टूर्निकेट लगाने&comma; घाव की ड्रेसिंग&comma; दर्द नियंत्रण और स्यूचरिंग जैसी आपातकालीन प्रक्रियाओं का भी सिमुलेशन किया गया। इसके डिजिटल इन्वेंटरी सिस्टम और स्वनिर्भर तरीके से काम करने की क्षमता का भी प्रदर्शन किया गया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पानी में दो लोगों के गिरने के सिमुलेटेड परिदृश्य में डॉ&period; सी&period; बी&period; नारायण के नेतृत्व में एनडीआरएफ टीम ने तकनीकी जल बचाव अभियान चलाया। एक सिमुलेटेड कैजुअल्टी को मृत घोषित किया गया जबकि दूसरे को सफलतापूर्वक पानी से बाहर निकालकर पुनर्जीवन और आपातकालीन चिकित्सा उपचार दिया गया। इस अभ्यास ने दिखाया कि जटिल आपदा की स्थिति में बचाव और चिकित्सा टीमों के बीच तेज और प्रभावी तालमेल कितना महत्वपूर्ण है। अर्जुन फाउंडेशन के करीब 30 स्वयंसेवकों ने सिमुलेटेड कैजुअल्टी और रोल प्लेयर के रूप में भाग लिया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी ने पूरे अभ्यास को वास्तविक आपदा जैसा माहौल देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और टीमों को अपनी तैयारियों को व्यावहारिक रूप से परखने का अवसर मिला। फुल स्केल फील्ड मॉक ड्रिल से पहले 24 जुलाई 2026 को एम्स पटना में टेबलटॉप एक्सरसाइज भी आयोजित की गई थी। इसमें संभावित आपदा परिदृश्य&comma; इंसिडेंट कमांड सिस्टम&comma; संसाधनों की तैनाती और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की रणनीति पर चर्चा की गई। इसके बाद HEOC&comma; बिहार सरकार और अन्य संबंधित हितधारकों के सहयोग से फील्ड मॉक ड्रिल आयोजित की गई जिससे तैयारियों को वास्तविक फील्ड परिस्थितियों में परखने का अवसर मिला।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अभ्यास के बाद डीब्रीफिंग सेशन आयोजित कर सामने आई कमियों&comma; चुनौतियों और सुधार की संभावनाओं की समीक्षा भी की गई। घटना स्थल का पहले से निरीक्षण&comma; स्थानीय प्रशासन के साथ समय रहते समन्वय&comma; मरीजों की सुचारु आवाजाही&comma; प्रभावी संचार व्यवस्था और संसाधनों की समय पर तैनाती को प्रमुख सीख के रूप में चिन्हित किया गया। प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल&comma; कार्यकारी निदेशक&comma; एम्स पटना ने मॉक ड्रिल में शामिल सभी टीमों के समन्वित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एम्स पटना आपदा और सामूहिक दुर्घटनाओं की स्थिति में त्वरित और प्रभावी चिकित्सा प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अपनी तैयारियों और संस्थागत क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; अनिल कुमार ने कहा कि एम्स पटना भविष्य में भी नियमित रूप से फुल स्केल मॉक ड्रिल आयोजित करने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने कहा कि बिहार के अलग अलग जिलों में इस तरह के अभ्यास आयोजित करने से आपदा चिकित्सा प्रतिक्रिया&comma; विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और मैदानी स्तर पर तैयारियों को और मजबूत किया जा सकेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स पटना ने डॉ&period; सी&period; बी&period; नारायण और एनडीआरएफ टीम&comma; डॉ&period; रागिनी मिश्रा और HEOC टीम&comma; रोहतास जिला प्रशासन&comma; पुलिस एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया एजेंसियों&comma; अर्जुन फाउंडेशन के करीब 30 स्वयंसेवकों तथा एम्स पटना के सभी डॉक्टरों&comma; नर्सिंग स्टाफ&comma; पैरामेडिक्स&comma; प्रशासनिक&comma; तकनीकी और सहयोगी कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मॉक ड्रिल के क्लिनिकल और ऑपरेशनल सिमुलेशन में योगदान देने वाले एम्स पटना के सदस्यों में इरशाद&comma; असुति&comma; दीपिका राठौर&comma; मोना कश्यप&comma; लॉरेंस&comma; इंद्रजीत&comma; मोहन&comma; संगीता ठाकुर&comma; विकेश कुमार सिंह&comma; अमित कुमार&comma; कुंदन&comma; राजा&comma; दीपक और अर्जेश शामिल रहे। इनके साथ एम्स पटना की व्यापक क्लिनिकल&comma; लॉजिस्टिक्स&comma; प्रशासनिक और सपोर्ट टीमों ने भी अभ्यास को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह मेगा मॉक ड्रिल एक स्पष्ट संदेश लेकर आई कि आपदा आने के बाद तैयारी शुरू नहीं होती&comma; तैयारी पहले से की जाती है। करमचट बाँध में हुए इस अभ्यास ने दिखाया कि सही योजना&comma; त्वरित बचाव&comma; व्यवस्थित ट्रायेज&comma; मौके पर चिकित्सा सुविधा और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से आपदा की घड़ी में अनमोल जिंदगियों को बचाने की क्षमता को और मजबूत किया जा सकता है।<&sol;p>&NewLine;

Related posts

रोहित गोदारा-लिपिन नेहरा गैंग पर गुरुग्राम पुलिस का बड़ा शिकंजा, 6 बदमाश गिरफ्तार!

75 लीटर नेपाली देसी शराब केसाथ एक व्यक्ति गिरफ्तार, चोरी की होंडा बाइक जब्त!

एम्स पटना में पुलिस उपाधीक्षक अधिकारियों को दी गई मेडिको लीगल ट्रेनिंग