दिव्यांग, बुजुर्ग और पहली बार वोट देने वालों ने बढ़ाया लोकतंत्र का मान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> मतदान के बीच एक मानवीय तस्वीर तब देखने को मिली जब दिव्यांग&comma; बुजुर्ग और पहली बार वोट देने वाले युवाओं ने लोकतंत्र का उत्सव जीवंत कर दिया। मिलकीयाना सामुदायिक भवन बूथ पर दिव्यांग आबदा खातून को परिजनों ने व्हीलचेयर पर लाकर मतदान कराया&period; फुलवारी हाई स्कूल केंद्र पर राजू गुप्ता अपनी दिव्यांग माँ को मतदान कराने आए&period; 85 वर्षीय रिटायर्ड इंजीनियर शमीम अहमद खान को सहारा देकर बूथ तक लाया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पहली बार मतदान करने वाली युवती शैली इमाम ने कहा कि उन्हें गर्व है कि अब वह अपने भविष्य के लिए प्रतिनिधि चुन रही हैं&period; जेबा इमाम ने भी कहा कि वह चाहती हैं कि उनके वोट से रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ें&period; बुजुर्गों&comma; दिव्यांगों और युवा मतदाताओं के उत्साह ने फुलवारी शरीफ की मतदान कहानी को भावनात्मक और प्रेरक बना डाला।<&sol;p>&NewLine;

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