मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला – मां मुंडेश्वरी, बोधगया, सुल्तानगंज, मंदार और केसरिया को मिलेगा विश्वस्तरीय स्वरूप

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; à¤¨à¤°à¥‡à¤¶ अग्रवाल &colon;<&sol;strong> बिहार की हजारों साल पुरानी धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज मां मुंडेश्वरी मंदिर&comma; बोधगया&comma; सुल्तानगंज&comma; मंदार और केसरिया स्तूप के वैज्ञानिक सर्वे&comma; संरक्षण और विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मुख्यमंत्री से आज देश के वरिष्ठ पुरातत्वविदों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर&comma; कैमूर के सर्वे की रिपोर्ट सौंपी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>क्या-क्या होगा विकसित<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<ol class&equals;"wp-block-list">&NewLine;<li>मां मुंडेश्वरी और कैमूर क्षेत्र &&num;8211&semi; मंदिर परिसर में बिखरे हजारों प्राचीन भग्नावशेषों का वैज्ञानिक पुनर्स्थापन होगा। पूरे कैमूर को हेरिटेज एवं इको-टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा। तिलहाड़ कुंड&comma; करकटगढ़ जैसे स्थलों को भी जोड़ा जाएगा। ये सभी बनारस-कोलकाता एक्सप्रेसवे से सिर्फ 4 किमी दूर हैं।<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>बोधगया में हाईटेक सर्वे &&num;8211&semi; महाबोधि मंदिर परिसर में LiDAR और GPR तकनीक से बिना खुदाई सर्वे होगा। जमीन के अंदर छिपी पुरात्विक संरचनाओं की पहचान कर उत्खनन को सटीक बनाया जाएगा।<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>केसरिया स्तूप का पूर्ण उत्खन &&num;8211&semi; विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप के शेष हिस्से का वैज्ञानिक उत्खनन तेज होगा। अब तक सिर्फ आंशिक उत्खनन हुआ है।<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>सुल्तानगंज-मंदार &&num;8211&semi; धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन स्थलों के संरक्षण और समेकन पर विशेष जोर।<&sol;li>&NewLine;<&sol;ol>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>मुख्यमंत्री ने क्या कहा<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मुख्यमंत्री ने कहा बिहार की धरती के नीचे अब भी अनेक महत्वपूर्ण पुरात्विक धरोहरें सुरक्षित हैं। इनकी वैज्ञानिक पहचान और संरक्षण से राज्य के इतिहास के नए अध्याय खुलेंगे। इससे सांस्कृतिक पर्यटन को गति मिलेगी&comma; स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि इन स्थलों के विकास के बाद इन्हें यूनेस्को विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>बैठक में कौन रहे मौजूद<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पद्मश्री डॉ० के०के० मोहम्मद &&num;8211&semi; विश्व प्रसिद्ध पुरातत्वविद्&comma;<br &sol;>प्रो० डॉ० रजत सान्याल&comma; प्रो० अनिल कुमार &&num;8211&semi; बिहार विरासत विकास समिति&comma; ASI पटना के डॉ० हरिओम शर्मा&comma; विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह&comma; सचिव श्री प्रणव कुमार।<&sol;p>&NewLine;

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