उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ पूजा हुआ संपन्न

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;strong> लोक आस्था का महापर्व छठ के चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ चार दिनों तक चले छठ पर्व का समापन आज हो गया&period; à¤—ुरुवार को देशभर के हजारों लोगों ने सूर्य को अर्घ्य दिया और पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाई&period; सुबह से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालु पहुंचने लगे। जैसे ही सूर्य जब उगा तब श्रद्धालुओं ने अर्घ्य अर्पित किया। इसके बाद व्रती एक दूसरे को प्रसाद देकर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिए&period; आशीर्वाद लेने के बाद व्रती अपने घर आकर अदरक और पानी से अपना 36 घंटे का कठोर व्रत तोड़ी&period; इस तरह से पावन व्रत का समापन हो गया। à¤›à¤  पूजा के आखिरी दिन को उषा अर्घ्य का दिन भी कहा जाता है&period; इसे à¤ªà¤¾à¤°à¤£ भी कहते हैं&comma; क्योंकि इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ व्रत का पारण किया जाता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>छठ पूजा करने का उद्देश्य जीवन में सूर्यदेव की कृपा और छठ मैया का प्रेम-आशीष पाना है। सूर्य की कृपा से आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है तो वहीं छठ मैया के आशीष से इंसान को सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। छठ पर्व पर सूर्य देव और उनकी बहन छठ मैय्या की उपासना की जाती है। संतान के जीवन में सुख की प्राप्ति और संतान प्राप्ति के लिए छठ का व्रत रखा जाता है&period; छठ अकेली ऐसी पूजा है&comma; जिसमें उगते हुए और अस्त होते हुए सूर्य की पूजा की जाती है। अस्त होता सूरज जहां आपको कालचक्र के बारे में बताता है तो वहीं उगता सूरज नई सोच और ऊर्जा का प्रतीक है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए इन दोनों चीजों का होना बहुत ज्यादा जरूरी है।<&sol;p>&NewLine;

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