कोरोना से बचकर खूब मनाओ होली की खुशियां और सबको बांटो प्यार..

<p><strong>फुलवारीशरीफ&lpar;अजित यादव&rpar;&colon;<&sol;strong> सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच &lpar;एस&period;एस&period; एम&period;&rpar; के सप्ताहिक नुक्कड़ नाटक श्रृंखला में महेश चौधरी के द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक &&num;8220&semi;होली के रंग सबके संग&&num;8221&semi; वाल्मी&comma; फुलवारी शरीफ में प्रस्तुत की गई। नाटक का शुरुआत सौरभ राज के स्वरबघ्द गीत- होली का त्योहार है भैया खुशियों का त्योहार&comma; खूब मनाओ खुशियां और सबको बांटो प्यार&&num;8230&semi;&period;&period;से हुई&period;<&sol;p>&NewLine;<div dir&equals;"auto" style&equals;"font-family&colon;sans-serif&semi;font-size&colon;12&period;8px&semi;font-style&colon;normal&semi;font-weight&colon;400&semi;letter-spacing&colon;normal&semi;text-transform&colon;none&semi;text-align&colon;left">नाटक के माध्यम से यह दिखाया गया की अभी कोरोना का खतरा टला नही है ऐसे में सबको बीमारी से बचकर पर्व की खुशियों का आनंद उठाना है । होली एक पारंपरिक पर्व है जिसमें होलिका दहन के लिए हरे पेड़&comma; पौधे को लोग जला देते हैं इससे हमारा पर्यावरण को क्या होगा ऐसा लोग नहीं सोचते। प्लास्टिक&comma; टायर&comma; किरासन तेल&comma; मोबिल&comma; फसल का डंटल&comma;भूसा&comma; सुखी हुई पेड़ की पत्तियां और कचरे को भी लोग जला देते हैं इससे हमारा वायु प्रदूषित होता है जिससे फेफड़े और दिल आदी की बीमारी का होने का खतरा होता है। बाजारों में सस्ते दामों में बिकने वाला रंग में केमिकल्स कि मिलावटी से चमड़े की बीमारी होती है। अबीर में शीशे का बुरादा मिले रहने के कारण आंख में चले जाने से उसकी रोशनी भी चली जा सकती है। होली खेलने के लिए अपने घर में ऑर्गेनिक और नैचुरल रंग तैयार करें। जैसे चुकंदर&comma; गुलाब की पत्तियां&comma; हल्दी&comma; फूलो आदि से सुगंधित रंगो की होली खुशियों के साथ खेलें। आपसी एकता और भाईचारा बनाएं रखें&period; नाटक के कलाकार- महेश चौधरी&comma; मोनिका&comma; सौरभ राज&comma; अमन&comma; प्रमोद&comma; करण&comma;नमन&comma; यश&comma; कामेश्वर&comma; वैभव&comma; मुन्ना थे।<&sol;div>&NewLine;

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