अग्निगर्भ में जलती पंखुरियाँ पुस्तक चर्चा एवं लोकार्पण समारोह भोपाल में संपन्न

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>भोपाल&comma; à¤†à¤¶à¥€à¤· रंजन &colon; <&sol;strong>आशा पारस फॉर पीस एंड हारमनी फाउंडेशन द्वारा डॉ&period; वीणा सिन्हा के चर्चित उपन्यास <em>&OpenCurlyDoubleQuote;अग्निगर्भ में जलती पंखुरियाँ”<&sol;em> पर केंद्रित पुस्तक चर्चा एवं लोकार्पण समारोह का आयोजन दिनांक 12 मई मंगलवार को दुष्यंत कुमार पाण्डुलिपि संग्रहालय&comma; शिवाजी नगर&comma; भोपाल में किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो&period; आशा शुक्ला ने की। विशिष्ट अतिथि डॉ&period; प्रभुदयाल मिश्र और सारस्वत अतिथि श्रीमती साधना बलवटे उपस्थित रहीं। समारोह में साहित्य&comma; संस्कृति&comma; शिक्षा और समाजसेवा से जुड़े विद्वानों&comma; शोधार्थियों और साहित्यप्रेमियों ने हिस्सा लिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>चर्चा के मुख्य बिंदु &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<ul class&equals;"wp-block-list">&NewLine;<li>डॉ&period; वीणा सिन्हा ने बताया कि उपन्यास स्त्री जीवन&comma; संवेदनाओं और संघर्षों की अनकही परतों को सामने लाने का प्रयास है।<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>प्रो&period; आर&period;के&period; शुक्ला ने कहा कि साहित्य समाज में संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का माध्यम है।<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>अपर्णा पात्रीकर&comma; करुणा राजुरकर&comma; कुमार सुरेश&comma; रामाश्रय रत्नेश&comma; कुमकुम गुप्ता और अन्य वक्ताओं ने उपन्यास की भाषा&comma; शैली&comma; वैचारिक संरचना और समकालीन प्रासंगिकता पर बात की।<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>डॉ&period; विकास दवे &comma; निदेशक&comma; मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी ने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्यिक संस्कृति को नई ऊर्जा देते हैं।<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>प्रो&period; आशा शुक्ला ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं&comma; समाज को दिशा देने वाली शक्ति है।<&sol;li>&NewLine;<&sol;ul>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में उपन्यास पर आधारित आलेखों के 21 योगदानकर्ताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। अंत में डॉ&period; वीणा सिन्हा का सम्मान किया गया। संचालन विशाखा राजुरकर ने किया और धन्यवाद ज्ञापन लव चावडीकर ने प्रस्तुत किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आयोजकों के अनुसार यह आयोजन साहित्य&comma; संवेदना और सामाजिक सरोकारों का सशक्त संगम रहा।<&sol;p>&NewLine;

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